“कामयाबी वही, जो इंसान को ऊँचा उठाए—उसका ज़मीर न गिराए।”
आश हम्द, पटना( बिहार)
सौदा
मंत्री जी के इस तरह देखने पर लैला को बहुत अजीब सा लगा। उनकी नज़रें बिल्कुल अच्छी नहीं थीं लेकिन लैला एकदम से वहाँ से जा भी नहीं सकती थी। तभी जमीला किसी फरिश्ते की तरह उसके पास चली आई। उसके आते ही लैला बहाने से उठ गई।
तभी लैला ने देखा कि मंत्री जी और बशीर बातें करते-करते अंदर कमरे में चले गए।
काफी देर तक जब बशीर कहीं दिखाई नहीं दिया तो लैला ने सकीना से पूछा—
“सकीना, बशीर कहीं दिख नहीं रहे हैं, कहाँ गए हैं?”
“अरे वो मंत्री जी के साथ कुछ बात कर रहे हैं अंदर।”
सकीना ने आराम से बताया।
“काफी देर हो गई है, आप जाकर देखिए न!”
सकीना सिर हिलाती हुई कमरे की ओर बढ़ गई। अंदर देखा तो मंत्री जी तो कहीं नज़र नहीं आए मगर बशीर भाई बेहद परेशान से टहल रहे थे।
“क्या हुआ भाई, आप परेशान लग रहे हैं?”
“क.. कक.. कुछ नहीं, मैं ठीक हूँ।”
वो अपना माथा सहलाता हुआ बोला। वो ऐसा तभी करता था जब बहुत परेशान होता था। सकीना समझ गई उसका भाई किसी बात को लेकर बहुत परेशान है।
कितने दिनों बाद तो उसने अपने भाई को सच में ख़ुश देखा था और अब वह फिर बेपनाह परेशान लग रहे थे। सकीना ने बशीर को सोफे पर बिठाकर पानी पिलाया और फिर पूछा तो वो उसका चेहरा देखने लगा और फिर जो कुछ उसने बताया, सकीना के पैरों तले की ज़मीन खिसक गई।
उसने भाई को ज़ोर का धक्का दिया और खड़ी हो गई।
“भाई, अगर आपने ऐसा कुछ किया तो आप न दीन के रहेंगे ना दुनिया के। ऐसा करने का सोचिएगा भी नहीं भाई!”
“सक्कु.. मेरी बहन.. मैं भी ऐसा बिल्कुल नहीं चाहता लेकिन फिर वो मेरा टिकट कैंसल कर देंगे, इतने साल की सारी मेहनत बेकार हो जाएगी। बस एक रात की बात है सकीना, फिर उसे मेरे ही पास तो आना है। मैं उसे कभी एहसास भी नहीं होने दूंगा कुछ भी।”
“बहुत अफ़सोस हुआ भाई आपके ख़्याल जानकर। एक बात तो मुझे पता है कि आप मेरी बात नहीं सुनोगे, मगर मैं अपनी बात कह तो सकती हूँ। भाई, अब तक हमने आपके बहुत सारे किए गए ग़लत फैसले बर्दाश्त किए हैं लेकिन अब बस… आज से, अभी से मैं आपसे अपना हर रिश्ता तोड़ती हूँ और जमीला भी। और अगर उसने आपसे कोई भी ताल्लुक रखा तो वो भी मेरी कोई नहीं होगी।”
कहकर सकीना चली गई और बशीर सीधा लैला के पास आ गया।
“आप कहाँ चले गए थे बशीर?”
“कहीं नहीं यहीं था। लैला! मुझे तुमसे एक बहुत ज़रूरी बात करनी है।”
“जी कहिए, क्या हुआ सब ठीक है ना?”
“हाँ, सब ठीक है। सब कुछ और भी सही हो जाएगा अगर तुम मेरा साथ दो। लैला…! मंत्री जी को तुम बहुत भा गई हो यार! वो आज की शाम तुम्हारे साथ गुज़ारना चाहते हैं।”
बशीर ने सिर झुकाकर कहा।
और उसकी बात सुनकर लैला पत्थर सी हो गई।
(क्रमश:)