(EDITED BY AI)
कभी यादों की कसक, कभी मोहब्बत का दर्द… एहसासों में डूबी दिल की कुछ अनकही बातें।
शबनम मेहरोत्रा, कानपुर (उत्तर प्रदेश)
जज़्बात
अतीत की यादों को
भूलने का प्रयास करती हूँ,
पर! यादें वो शै हैं
कि भूलने से पहले
वही याद आ जाती हैं।
कैसे भूलूँ वे बीते पल,
हँसी-खुशी, आँसू…
कुछ भी तो नहीं रोक पाती हूँ।
बरबस चलचित्र की मानिंद
उभर आती हैं दृष्टि में
और अनचाहे ही
चली जाती हूँ मैं
‘फ़्लैश बैक’ में।
‘डिलीट’ करने का
‘ऑप्शन’ भी तो नहीं है।
लगता है, ये यादें तभी खत्म होंगी
जब यह काया
विलीन हो जाएगी मिट्टी में।
और तब शायद
मैं आ जाऊँगी किसी की यादों में…
किसी की यादों में…
किसी की यादों में।
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बेख़बर
तुम भी न कर सके कुछ ख़याल मेरा,
पलट के पूछा नहीं एक बार हाल मेरा।
बहुत कुछ पूछना था, मन में उठे सवालों को,
मगर रह गए मन ही में हर सवाल मेरा।
छोड़कर मुझको तुम इतनी दूर जा बसे हो,
हो गया हर पल को जीना मुहाल मेरा।
कभी सपने में भी गर आ जाते ओ सनम,
सच कहूँ, हो जाता ये दिल निहाल मेरा।
तुम्हें बुरा कह दूँ, मेरी आदत नहीं,
शबनम, आकर पहले-सी ख़ुशी कर दो बहाल मेरा।
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पहचान
जिधर भी जाएँगे, हम अपनी महक छोड़ जाएँगे,
लहू में बुलबुले और कानों में धमक छोड़ जाएँगे।
जहाँ में कल मैं रहूँ न रहूँ, कल को किसने देखा है,
गीत सुनने को हमारे एक ललक छोड़ जाएँगे।
हम नहीं अब्र से गिर जाएँ, वह हैं आतिश-पारा,
जिधर से गुज़रेंगे, अपनी चमक छोड़ जाएँगे।
लौट जाएँगे हम आपके इस शहर से, लो आज,
आपके दिल में अकेलेपन की कसक छोड़ जाएँगे।
छत पे गिन-गिन क्या तुम रात बिता पाओगे,
तुम्हारे वास्ते, शबनम, काली उफ़क छोड़ जाएँगे।
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इश्क़
ज़रा आओ हमारे साथ, थोड़ी दूर चलना है,
अगर है इश्क़ तुझको, तो मेरे साँचे में ढलना है।
तुम्हें जो डर लगे, कसकर हमारा हाथ लो थामो,
अभी है दूर मंज़िल और तुम्हें कुछ दूर चलना है।
न मेरा दिन ही कटता है, न मेरी रात कटती है,
हमारे दिल को पड़ता है कभी दो पल को चलना है।
घड़ी मुश्किल की आती है, नहीं कोई पास आता है,
फिसल जाऊँगी खुद से तो मुझे ख़ुद ही सँभलना है।
तू जलती आग है और मैं हूँ छोटी मोम की गुड़िया,
मुझे मालूम है, इस राह में शबनम को जलना है।
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यादें
मेरी यादें कसकती रहीं रात भर,
वो न आए, तरसती रही रात भर।
रात गुज़री मेरी करवटें ले-लेकर,
चूड़ियाँ भी खनकती रहीं रात भर।
नींद आती तो आती मुझे किस तरह,
बिजलियाँ चमकती रहीं रात भर।
क्या बताऊँ किस बेचैनी में रात बीती,
भावनाएँ लरज़ती रहीं रात भर।
ये करिश्मा है उनकी नज़र का लगा,
मेरी आँखें तरसती रहीं रात भर।
मैं बिखरती नहीं, शबनम, जाने वो वास्ते,
उनके बिखरती रही रात भर।
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