(EDITED BY AI)
“मंज़िल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है। पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।”
उत्तम कुमार तिवारी ‘उत्तम’, लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
…सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ। राघवेंद्र ने काँपते हाथों से परिणाम देखा। इस बार सूची में उसका नाम था!
वह कुछ पल तक स्क्रीन को देखता ही रह गया। उसे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था। फिर उसकी आँखों से ख़ुशी के आँसू बहने लगे। जिस सपने को पूरा करने के लिए उसने न जाने कितनी रातें जागकर बिताई थीं, आज वह सपना साकार हो चुका था।
उसका चयन एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में हो गया था और आगे चलकर उसे ज़िले के कलेक्टर के पद पर नियुक्ति मिली।
राघवेंद्र ने सबसे पहले गुरुद्वारे के ग्रंथी साहब और अपने उन प्रोफ़ेसर को यह शुभ समाचार दिया, जिन्होंने कठिन समय में उसका साथ दिया था। दोनों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्हें गर्व था कि जिस लड़के ने कभी अभावों के बीच संघर्ष करते हुए उनके सामने अपने सपनों की बात कही थी, आज वह अपनी मेहनत के बल पर उस मुक़ाम तक पहुँच गया था।
इसके बाद उसने अपने माता-पिता को फ़ोन किया।
“बाबूजी, आपका बेटा अफ़सर बन गया!”
यह सुनते ही उसके माता-पिता की आँखों से आँसू बहने लगे। वे आँसू वर्षों के संघर्ष, त्याग, चिंता और आज मिली अपार ख़ुशी के थे। जिस बेटे को उन्होंने सीमित साधनों के बावजूद पढ़ने के लिए प्रेरित किया था, आज उसने उनका सिर गर्व से ऊँचा कर दिया था।
पूरे परिवार में ख़ुशी की लहर दौड़ गई। वह दिन उनके जीवन का सबसे यादगार दिन बन गया।
संयोग से राघवेंद्र की पहली नियुक्ति उसके अपने ही ज़िले में हुई। अब वह उसी मिट्टी की सेवा करने जा रहा था, जहाँ से उसने अपने सपनों की उड़ान भरी थी।
जिस ग़रीबी को देखकर उसने बचपन में अपना जीवन बदलने का संकल्प लिया था, अब वह चाहता था कि उसके ज़िले के किसी दूसरे बच्चे को केवल पैसों की कमी के कारण अपने सपनों से समझौता न करना पड़े।
राघवेंद्र की कहानी हमें सिखाती है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि मन में दृढ़ संकल्प हो, मेहनत करने का जुनून हो और स्वयं पर विश्वास हो, तो रास्ते धीरे-धीरे खुलने लगते हैं।
सफलता उन्हीं के क़दम चूमती है, जो असफलताओं से घबराकर रुकते नहीं, बल्कि हर ठोकर के बाद पहले से अधिक मज़बूती के साथ उठ खड़े होते हैं।
इसीलिए तो कहा जाता है—
“जहाँ चाह है, वहाँ राह है।”
जुनून है तो जीत है!
(काल्पनिक रचना)
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