“पहला कवि सम्मेलन ही आख़िरी क्यों बना—कविता कम, कवियों का तमाशा ज़्यादा!”
पंकज शर्मा “तरुण “, मंदसौर (मध्य प्रदेश)
पिछले दिनों मुझे एक कवि सम्मेलन में अपनी रचना पढ़ने के लिए आमंत्रित किया! मैं इस आमंत्रण को पा कर अपने आप को धन्य समझ रहा था! कारण यह था कि मेरे जीवन का यह पहला कवि सम्मेलन था!जी हां इसके पहले मुझे किसी भी आयोजक, प्रायोजक ने इस काबिल नहीं समझा था।मैं बल्लियों उछल रहा था और बार- बार आइने के सामने खड़े हो कर अपने मुख की भंगिमा देख- देख कर स्वयं से प्रश्न कर रहा था तू कवि है?कब से कवि हो गया?? और मन ही मन मुस्कुरा देता था!पत्नी इन अजीब हरकतों को बहुत देर से देख रही थी, उससे रहा नहीं गया तो मुझसे अकड़ कर पूछने लगी क्या पागलों जैसी हरकतें कर रहे हो,बहुत देर से बर्दाश्त कर रही हूं!
मैं अंदर ही अंदर सहम गया, मगर फिर भी बहादुर पति का अभिनय करते हुए बोला– कैसी बातें कर रही हो भगवान मेरी खुशियां तुम्हें बर्दाश्त क्यों नहीं होती?हाथ में कार्ड देख कर बोली यह कहां का कार्ड है? जरा बताओ तो? मैं खिसियानी हँसी हँसता हुआ कार्ड उसकी तरफ बढ़ाता हुआ मिमियाया! म म म ..मुझे कवि सम्मेलन में आमंत्रण पत्र मिला है!उसकी आँखें यूं फटी रह गई जैसे कोई बम फटा हो!बोली कौन मूर्ख तुम्हें कवि समझता है ?जो इस तरह बिना विचारे अपना कार्यक्रम बिगाड़ने के लिए मंच पर बुला रहा है।कार्ड को पढ़ कर बोली अरे वाह अखिल भारतीय कवि सम्मेलन!कवियों के नाम को गिनती हुई बारी- बारी से उच्चारण कर बोली पंद्रह कवि!बाप रे मैं मन ही मन उसकी इस स्थिति को देख कर मुस्कुरा रहा था,क्योंकि इसने जब से मैं रिटायर हो कर घर में फालतू पड़ा रहता हूं !उसको मैं एक कबाड़ सा लगने लगा हूं!
पलंग पर पड़ा या तो टी वी देखता रहता हूं या फिर मोबाइल पर कविताएं लिखता रहता हूं! कभी जैसे ही बाजार का काम बताती है, तुरंत उठ कर खड़ा हो जाता हूं और सामान की लिस्ट लेकर बाजार चल पड़ता हूं!इतना तो मुझे पता है कि यदि घर में शांति से रहना है, तो आज्ञाकारी पति बनना ही होगा।नौकरी में था तो बॉस के आदेशों का पालन करने तथा उनको खुश रखने के सारे गुर मुझे आते थे।वही गुर आज घर में भी काम आ रहे हैं!
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन की निर्धारित तिथि आई तो मैं अपनी तैयार की गई अर्थात लिखी गई प्रतिनिधि रचनाओं को लिख साथ ले कर चल पड़ा।पत्नी ने कुमकुम का टीका लगा कर शुभकामनाएं दीं!!तथा कवि सम्मेलन में कैसे उठना बैठना और काव्य पाठ करना निर्देश दिए।जैसे वह खानदानी कवि हो!आज्ञाकारी होने के नाते सहमति में सिर हिला उससे विदा ले कर चला।कवि सम्मेलन स्थल पर पहुंचा तो लगभग सभी आमंत्रित कवि आ चुके थे।प्रारंभ में संचालक के रूप में आए कथित कवि द्वारा उद्घोषणा की गई कि पहले स्थानीय गणमान्य नागरिकों का पुष्प माला से स्वागत सत्कार किया जाएगा।जैसे पूजा में स्थानीय देवता को पूजा जाता है !!
सभी के नाम पुकारे गए इतने गणमान्य नागरिक थे कि मंच ही छोटा पड़ गया!इस भव्य सम्मान समारोह के पश्चात हम कवियों का नंबर आया बारी- बारी से सबके नाम पुकारे गए और परिचय करवाया गया।सभी को पीले दुपट्टे पहनाए गए जैसे गले में पट्टा बांध दिया जाता है!!अब हमारे ही प्रजाति अर्थात एक कवि को संचालक बनाया गया।हास्य रस के महान कवि थे!! जिनका नाम मैने पहली बार सुना था!शायद यह मेरा दुर्भाग्य ही था।कवि का नाम पुकारा जाता, उसके पहले वह दस पंद्रह मिनट तक भौंडे भद्दे चुटकुले सुनाता और खुद को कपिल शर्मा के वंशज होने का अहसास करवाता!यह दौर हर अगले कवि और पिछले कवि के मध्य की गैप पर दोहराया जाता।
(क्रमश:)
No Comment! Be the first one.