“शिवत्व में समाया समूचा संसार—नटराज के नृत्य से मोक्ष, शक्ति और सृष्टि का साक्षात्कार।”
यशवंत कोठारी, जयपुर
हर व्यक्ति को आसानी से उपलब्ध देव हैं- शिव। शिव की यही सहजता उसे अन्य देवों से अलग विशिप्ट बनाती है। डा.ॅ राममनोहर लोहिया ने राम कृप्ण और शिव में लिखा है- ‘‘असीम तात्कालिकता की इस महान पुराकथा ने बढ़प्पन के दो और स्वप्न दुनिया को दिए हैं, जब देवों और असुरों ने समुद्र मंथा, तो अमृत के पहले विप निकला। किसी को यह विप पीना था।
शिव ने उस देवासुर संग्राम में कोई हिस्सा नहीं लिया और न तो समुद्रमंथन के सम्मिलित प्रयास में ही लेकिन कहानी बढ़ाने के लिए वे विपपान कर गए। उन्होंने अपनी गर्दन में विप को रोके रखा और तब से वे नीलकंठ के नाम से जाने
जाते हैं। दूसरा स्वप्न हर जमाने में हर जगह पूजने योग्य है जब एक भक्त ने उनकी बगल में
पार्वती की पूजा करने से इंकार किया, तो शिव ने आधा नारी, अर्धनारीश्वर रुप ग्रहण किया। मैंने आपादमस्तक उस रुप को अपने दिमाग में उतार पाने में दिक्कत महसूस की है, लेकिन उसमें बहुत
आनंद मिलता है। वास्तव में संसार के दुखों को विपों को पीकर आने वाली पीढ़ी के लिए केवल अमृत
बचाए रखना ही शिवत्व है।’’
डा. आनन्द कुमार स्वामी ने डी डान्सेज आफ शिव के नृत्यों का बड़ा मनोहारी चित्रण किया है। उनके
अनुसार चटराज के लिए पूरा संसार नाट्य शाला है। वे स्वयं ही नर हैं अर स्वयं ही प्रेरक भी हैं।
शिव की तीन नृत्यों का उल्लेख डा. स्वामी ने किया है।
1.स्वर्गिक, 2. तांडव नृत्य, 3. नादत नृत्य।
शिव प्रदोप स्तोत्र में स्वर्गिक सहगान का विस्तृत वर्णन है। तांडव नृत्य का ष्शाक्त साहित्य में
विस्तृत वर्णन है। दक्षिण भारत की प्रतिभाओं में वर्णित नांदत नृत्य में शिव को चार भुजाओं में
नृत्यरत दिखाया गया है। सच में शिव संहार कर्ता है तो क्या शिव का शिवत्व केवल संहार, नप्ट कर
देने में है। वे किसको नप्ट करते हैं। किसका संहार करते हैं। श्मशान क्या है। वे अहं, अहंकार, कर्मो,
भ्रमों का नाश करते हैं ओव इस दाहकर्म के बाद वे तांडव करते है। बंगाल में शिव के मातृ पक्ष की
पूजा होती है। वहां काली नृत्य करती है। शिव और शिव का मातृ पक्ष यानी काली, दुर्गा, भवानी, का
पूजन अर्चन भी शिव के शिवत्व का एक भाग या रुप है।
शिव को शिवालत्व या उॅं नमः शिवाय से कहा गया है। इस पंचाक्षरी प्रार्थना के बाद आत्मा शिव और
शक्ति को एकाकार कर देती है। शिव का विकार, सबसे उपर उठाकर शक्ति के साथ एकाकार हो जाता
है। वास्तव में शिव ही शिवत्व है शिव से अलग शक्ति नहीं है और शक्ति से अलग शिव नहीं यही
शिवत्व है। इसलिए कहा गया है- नमः शिवायै च नमः शिवाय।
sunitakothi@gmail.com