“कुछ मोहब्बतें मुकम्मल नहीं होतीं, फिर भी पूरी ज़िंदगी का सहारा बन जाती हैं।”
आश हम्द, पटना (बिहार)
…शाम हो चली थी, शाम की धुंध रात में बदल गई थी । सबके घरों में बाहर हर तरफ बत्तियां रौशन हो गई थी ।
एजाज ने भी अपने शिकारे को रौशन कर दिया था, रंग-बिरंगे परदों से सजा शिकारा रौशनी में जगमगाते हुए बहुत ख़ूबसूरत लग रहा था । वह हमेशा अपने शिकारे को सजा-संवार कर रखा करता ताकि पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर सके । यही वजह थी कि, उसके शिकारे पर सबसे ज़्यादा ग्राहक आते थे, जिसकी वजह से बाकी शिकारे वाले उससे जलते-कुढ़ते रहते । मगर..एजाज उनसे भी हमेशा अच्छा व्यवहार करता । इसलिए वह लोग भी कभी खुलकर इस बात का इजहार नहीं कर सके, उल्टा एजाज के इतने अच्छे व्यवहार स्वभाव देखकर वह अक्सर शर्मिंदा हो जाते थे
अब एजाज बैठे-बैठे इंतज़ार करते हुए थक गया था । वह घर जाने की तैयारी करने लगा, तभी तीन-चार लड़कियां उसके पास आकर खड़ी हो गई ।
“ हेलो ! क्या आप शिकारे वाले हैं ?”
उनमें से एक लड़की ने उससे पूछा ।
“ ज,..जी..जी.. मेम साब ।”
एजाज ने जल्दी से जवाब दिया और ऊपर वाले को शुक्रिया कहा, देर से ही सही उसने रिज़्क तो भेजी ।
चार लड़कियां थी अब उसे उम्मीद थी कि, अच्छे पैसे मिल जाएंगे और वह लोग देखने में भी पहनावे से अच्छे-खासे धनवान लग रहे थे । वह शिकारे को झील में उतारने की तैयारी करने लगा ।
“ भैया.. हम चारों को सैर करनी है, कितना किराया लोगे ?”
उनमें से एक लड़की ने पूछा ।
“ मेम साब..दिन का किराया अलग होता है, रात का अलग, रात का किराया ज़्यादा है । तो मेम साब इसलिए आप चार जनों के चार हज़ार लगेंगे ।”
“ नीतू यार ! ये तो बहुत ज़्यादा किराया बोल रहा है ।”
उनमें से एक लड़की ने तूनक कर दूसरी लड़की से कहा ।
“ कोई ज़्यादा नहीं है, चलो ! चलते हैं ।”
जिनको नीतू नाम से पुकारा गया था उन्होंने कहा
“ नहीं यार, बहुत ज़्यादा बोल रहा है.. चल किसी और से पूछते हैं ।”
“ नहीं.. हम इसी शिकारे में जाएंगे, मैं दे दूंगी सबका किराया…चलो ! चलते हैं ।”
नीतू नाम की लड़की ने कहा और वह एजाज की ओर बढ़ी, तभी एजाज ने एक नज़र उसे देखा और जब देखा तो फिर देखता ही रह गया । वह अपनी पलकों को झपकना भूल गया, वह बेहद ख़ूबसूरत और हसीन लड़की थी । दूध सी सफेद रंगत, भूरे वालों और भूरी आँखों वाली जादूगरनी थी वह । आँखें इतनी जादुई थी कि, कोई एक नज़र देख ले उनका असीर हो जाए । एजाज भी पहली नज़र का क़ैदी हो गया था । उसे वहाँ उसके सिवा कोई दिखाई नहीं दे रहा था । उसे लग रहा था बस वही खड़ी है और वह देखे जा रहा था ।
उसे होश तब आया जब उनमें से ही एक लड़की ने आकर उसे हिलाया ।
“ ऐ ! शिकारे वाले भैया.. कहाँ खो गए हो ?.. सैर करवाओगे ?.. या हम कहीं और जाएं ?”
“ म.. मा..माफ़ी..मेम साब..चलिए.. आइए ।”
क्रमश: