“माटी से मोहब्बत, वीरों को नमन और आज़ादी की अमर गाथा।”
सुशीला तिवारी
तिरंगे की कसम
ये मिट्टी चंदन है, माथे से लगाने दो,
इस धूल में लिपटे शहीदों को जगाने दो।
सरहद पर खड़ा जवान जब रात भर जागता,
उसकी पलकों में माँ का सपना मुस्कुराता।
नदियों में बहता लहू नहीं, गंगाजल है,
हर बूँद में वंदे मातरम का हलचल है।
खेतों में हल चलाता किसान जब पसीना बहाए,
समझो वो भी तिरंगे का एक रंग चढ़ाए।
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना,
भारत का मतलब है सबको गले से लगाना।
ये झंडा कपड़ा नहीं, लाखों की दुआ है,
अशोक चक्र कहता है, चलो, वक्त रुकता नहीं।
जब तक साँस में जान, वतन से वफ़ा करेंगे,
हम मर के भी अपना फ़र्ज़ अदा करेंगे।
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बीरो की टोली
कफन शीश पर बांध कर, निकली बीरों की टोली,
मातृभूमि की लाज रखेंगे, लगा माथ पर रोली।
न उम्र का ख्याल किया, न प्राणों की चिंता की,
भारत माँ के चरणों में सबने अपनी हस्ती रख दी।
हाथों में बंदूकें थीं, आँखों में अंगारे थे,
दुश्मन के हर वार पे, ये सिंह दहाड़े थे।
ना डर था मौत का, ना कोई लालच जीने का,
बस एक ही सपना था, तिरंगा ऊँचा करने का।
खेत छोड़ कर किसान चला, कलम छोड़ विद्वान चला,
स्कूल छोड़ कर नौजवान, वतन के नाम कुर्बान चला।
गोली खा कर हँसते थे, वंदे मातरम कहते थे,
लहू से लिख कर धरती पर, अमर कहानी कहते थे।
उनकी बदौलत आज हम आज़ाद फिजा में साँस लेते,
उनके नाम का दीप जला कर हर दिवाली खास लेते।
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स्वतन्त्रता की अमर गाथा
जंजीरों में बंधी थी जो धरती, वो आज़ाद हुई,
खून से लिखी गई थी, ये आज़ादी की दास्तां नई।
1857 की क्रांति से चिंगारी ने अंगड़ाई ली,
झांसी की रानी बोली – “मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी”।
भगत सिंह की हँसी में बम की गूंज सुनाई दी,
सुभाष के नारे “तुम मुझे खून दो” ने नस-नस में आग लगाई।
गांधी की लाठी और चरखे ने अंग्रेज़ी हुकूमत हिलाई,
अहिंसा के बल पर भी आज़ादी की राह बनाई।
लाठी खाई, जेल गई, फांसी पर झूले मस्ताने,
“भारत माता की जय” बोलकर प्राण तिरंगे पे वारे।
लक्ष्मीबाई, तात्या, चंद्रशेखर, बिस्मिल अमर हुए,
नाम न जाने कितनों के, पर कुर्बानी सबकी अमर हुई।
15 अगस्त 47 को तिरंगा लहराया आसमान में,
सदियों की गुलामी टूटी, खुशी छाई हिंदुस्तान में।
आज हम खुली हवा में साँस लेते हैं शान से,
ये कर्ज़ है उन शहीदों का, जो लौटे नहीं मकान में।
स्वतन्त्रता कोई तोहफा नहीं, ये बलिदान की गाथा है,
इसे सँभाल कर रखना, यही अमर वतन की बाता है।