“हर शेर में दिल की धड़कन, हर लफ्ज़ में मोहब्बत का बयान।”
शबनम मेहरोत्रा कानपुर
सारांश :
इन ग़ज़लों में प्रेम, विरह, उम्मीद और आत्म-संघर्ष की सूक्ष्म भावनाओं को दिल से महसूस किया गया है। हर रचना दिल की दीवारों पर टंगे उन एहसासों को छूती है, जिन्हें शब्दों में कहना आसान नहीं होता। इन ग़ज़लों में मोहब्बत की गहराई, तड़प की मिठास और आत्मस्वीकृति की रोशनी झलकती है।आइए हाल—ए—दिल को बयां करती इन दिलकश चार गजलों का आनंद लें पूरे विस्तार से—
तेरी तस्वीर
जब मन उदास होता है तेरी तस्वीर देख लेती हूँ
अपने पाँवों में पड़ी लाज की जंजीर देख लेती हूँ
जिस ग़म ए फुर्कत से रोज होती रहती हूँ मैं घायल
टंगी दीवार पर सामने हर दिन वो शमशीर देख लेती हूँ
बंद कमरे में सोचते सोचते जब नज़र जाती है ऊपर
सपाट दीवार और छत में लगी शहतीर देख लेती हूँ
कोई सूरी भी नहीं और न हूँ मैं कोई नजूमी
अपनी हालात के तजुर्बे से अपनी तकदीर देख लेती हूँ
ये तिलिस्म तोड़ कर शबनम निकल ना ही होगा
अब तो एक बार आज़मा कर के
तदवीर देख लेती हूँ
^^^^^^^^^^^^^^
मेरा नाम
लब को गुलाब जुल्फों को वो शाम लिख दिया
लिखने को गजल बोली मेरा नाम लिख दिया
हमने कहा कि प्यार की तू शुरुआत लिख दिया
मर्जी से अपनी खुद ही वो अंजाम लिख दिया
अनमोल हीरा हो ये समझती रही अबतक
ये क्या किया जो तूने अपना दाम लिख दिया
तै कर लिया था तुमको कोई खत न लिखूँगी
पर अपने खत में तुमने तो सलाम लिख दिया
अब तो मुशायरों में नहीं आता वो शबनम
खुद को ही मेरे वास्ते वो से अनाम लिख दिया
^^^^^^^^^^^^^^
इजहार
ये न समझना की तुम्हें प्यार नहीं करते
बस अपने प्यार का इजहार नहीं करते
तुम्हें बाहों में भर लूँ ये तमन्ना जवान है
मन ही मन में सोचते हैं गुहार नहीं करते
आप के मन में भी ये अरमान जागते होंगे
यूँ मेरी तरह दिल को बेदार नहीं करते
हमने कभी आपसे खुल कर नहीं माँगा
मालूम है की आप भी इंकार नहीं करते
मेरी जरूरतों को भी आप देखिए हुजूर
शबनम यूँ बेकार में मनुहार नहीं करते
^^^^^^^^^^^^^^
लम्हा
तेरी हसरत में लम्हा लम्हा मरते हैं
सोच कर देख हम क्यों ये करते हैं
इश्क की राह में दीवार अपने ही बने
उने मालूम नहीं हम कहाँ डरते हैं
नसीब पारिजात पुष्प का भी देखो
रात भर खिलते सुबह बिखरते हैं
जुनून होता है जिसमें मंजिल पाने का
कुछ ऐसे लोग ही सब कर गुजरते हैं
समझ नही शबनम आया उनका ये कारोबार
इधर की मिट्टी अन्य तरफ वो भरते हैं