जहाँ सच की कसक, रीत की पीड़ा और प्रीत की मर्यादा—संगीत बनकर बोलती है।
शबनम मेहरोत्रा कानपुर
सारांश :
ये गीत और ग़ज़लें जीवन के उन सूक्ष्म सत्यों को स्वर देती हैं, जहाँ सच बोलना भी साहस बन जाता है। रीत और अतीत की उलझनों में फँसा मन, बेहतर भविष्य की तलाश करता दिखता है। प्रीत को मर्यादा और सहमति के साथ परिभाषित किया गया है, जहाँ स्वार्थ का कोई स्थान नहीं। प्रकृति, प्रेम और संगीत—तीनों को आत्मा से जोड़ने का आग्रह इन रचनाओं में निहित है। समग्र रूप से यह गीत—गजल संग्रह संवेदना, विवेक और आत्मिक जागरण का स्वर है।आइए, इनका रसास्वादन करें विस्तार से—
सच
सच बोलने की मुझमें औकात नहीं है
ये सच है कि पहले सी हालात नहीं है
तुम प्यार से सुनती थी कभी दिल की हर बाते
तुम चुप हो गई हो जैसे कोई बात नहीं है
वो बैठ गए हैं कोई उत्तर न दिया करते
जैसे कि लो हमारी कोई जज़्बात नहीं है
तुझको भी पता है कि तुझे जाना है
एक दिन कोई हमेशा ठहरे वो कायनात नहीं है
जितना भी भ्रम पाल ले शबनम है तेरी सोच
स्वतंत्र नागरिक हो कोई सम्राट नहीं है
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रीत
जग की रीत नीत क्या बोलूँ
कैसा था ये अतीत क्या बोलूँ
अच्छे दिन की आशाओं में
कितना हुए व्यथित क्या बोलूँ
तुम तो यार अमीर के निकले
तुमसे अपनी प्रीत क्या बोलूँ
राग रागिनी तुम नहीं जानते
तुमसे मैं संगीत क्या बोलूँ
वो सत्ता के मद में है पागल
शबनम है भयभीत क्या बोलूँ
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प्रीत
गीत अपने स्वार्थ की बात करूँ
यह प्रीत की रीत नहीं हैं
मर्यादा से आगे बढ़े उसमें तो प्रीत नहीं है
प्रेम समर्पण भाव माँगता ईश्वर हो या प्रियतम स्वार्थ भाव से नहीं टिकेगा
प्रियतम है जो अनुपम मठा को जितना मथ लो, पर नवनीत नहीं है
मर्यादा से आगे बढ़े जो उसने प्रीत नहीं है
देखो विहंगो की चह चह को नदी की कल कल धारा इसमें भी संगीत बसा है
सुनलो प्यारा प्यारा दिल को जो न छु कर गुज़रे वो संगीत नहीं है
मर्यादा से आगे बढ़े उसमें तो प्रीत नहीं है
सहमति हो न अगर प्रेम में प्रेम नहीं टिक पाता बांध तुम कितने बांधो
शबनम जल तो बहता जाता स्वार्थ की जो भी बात करेगा वह मन मीत नहीं है
मर्यादा से आगे बढ़ें उसमें तो प्रीत नहीं है
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संगीत
नई पुरानी परंपरा की खुद से रीत जोड़ ले
काया और आत्मा से अब तू प्रीत जोड़ ले
सब के मन में वो बसे हैं उनसे कैसी घुंघटा
वो सभी के मीत है
तू मन का मीत जोड़ ले
कविता की तुम हर विधा में
काव्य की रचना करे
फिर न क्यों तू प्रभु चरण के संगीत जोड़ ले
भूतकाल काली तुम्हारी वर्तमान अच्छा नहीं
फिर भविष्य से क्यों नहीं अतीत जोड़ ले
नाम होगा यश मिलेगा लोग जानेंगे तुम्हें
जिंदगी में शबनम अब संगीत जोड़ ले