“जब अनुमति बाहर से नहीं, भीतर से मिलती है—तभी आत्मसम्मान बोलता है।”
️सुनीता मिश्रा, देहरादून
अर्चना की ननद-नंदोई को आए हुए आज तीन दिन हो गए थें।अर्चना के पति प्रकाश जी, नंदोई और ननद बालकनी में बैठकर बातें कर रहे थें। हंसी मजाक का दौर चल रहा था।
अर्चना रसोई घर में चाय और पकोड़ा बना रही है। हंसतीं खील-खिलाती ननद और बीवी से डरे बगैर सच बोलने वाले नंदोई अर्चना को बेहद पसंद थें। घर में खुशी का माहौल है। वैसे भी अर्चना ससुराल में अगर किसी को सबसे ज्यादा करीब समझती है, तो वह उसकी ननद ही है।
अर्चना की ननद अक्सर हंसते-हंसते अर्चना पर बहुत सारे व्यंग-ताने बोल जाती है किंतु इसके बावजूद भी अर्चना खुद को अपनी ननद के करीब रखती हैं।
अर्चना अपनी जिंदगी का हर खुशी और गम एक-एक बात अपनी ननद से शेयर करती है किंतु ननद ऐसा नहीं करती है।
वह कोई भी बात अपने भाई प्रकाश जी को बताती है, यानी अर्चना के पति को, और साथ ही प्रकाश जी को सतर्क भी करती रहती है कि किसी को नहीं बताया करें।
अर्चना को परिवार के दूसरे सदस्यों से जो बातें महीनों बाद पता चलता है, वह सारी बात अर्चना के पति को पहले से पता रहता है। किंतु अर्चना को पारिवारिक बातों से हमेशा दूर ही रखा जाता है।
घर के हर दुख-सुख में अर्चना तन मन धन से शामिल होती है किंतु 25 साल बाद भी उसे घर में वह इज्जत मान और अधिकार नहीं प्राप्त हुआ, जो बाकी सदस्यों को मिला हुआ है।
अर्चना चाय लेकर बालकनी में पहुंची। बातचीत और हंसी-मजाक चल रही थी। सभी के चेहरे पर हंसी खिल रही थी। अर्चना गरमा गरम पकोड़े और चाय रखते हुए बोली;
चलिए पहले पकौड़े के संग चाय पीते हैं। इसी बीच नंदोई ने मोबाइल ऑन किया और एक वीडियो देखकर हंसने लगे। यह वीडियो अर्चना का था।
अर्चना कुछ दिनों से टाइम पास के लिए हल्का-फुल्का हंसी मजाक वाला रील बनाने लगी है। जो परिपक्वता, संस्कार और सभ्यता को संभाले होते हैं।
“एक बात बताओ भैया भाभी को रील बनाने की सलाह किसने दे दी? “
अर्चना की ननद भाई की तरफ देखते हुए व्यांगात्मक आवाज में बोली।
“मैंने तो नहीं दिया पता नहीं?!” प्रकाश जी चेहरे को नकारात्मक ढंग में घूमाते हुए बोले। ऐसा लगा मानो किसी बड़े गुनाह में सामिल होने से बचना चाह रहे हैं।
भाई बहन के चेहरे के भाव का उतार-चढ़ाव देखकर रचना तिल मिलाकर रह गई। सालों से वह इसी व्यवहार का सामना करते आई है किंतु एक आस हमेशा से उसके मन में बनीं रही, की एक दिन सब कुछ ठीक हो जाएगा।
एक दिन अर्चना के रंग रूप में कमियां नहीं गिनाई जाएगी।
उसके रहन-सहन पहनावा यहां तक बात विचार पर भी पाबंदियां लगाने की कोशिश नहीं की जाएगी किंतु ऐसा नहीं हुआ।
शादी के 25 साल बाद भी अर्चना को उसी पीड़ा का सामना करना पड़ता है। और शायद इसीलिए अर्चना परिवार से दूरी बनाकर रखना चाहती है।
ननद का आज का यह व्यंग अर्चना के हृदय ने सहने से इनकार कर दिया। बहुत हुआ अब और नहीं!! अर्चना के हृदय ने विरोध करना शुरु किया।
क्रमश: