“नारी को सम्मान, तो समाज को पहचान।”
”वाह रे स्त्री! तेरा यह समर्पण”
वाह रे स्त्री! तेरा यह समर्पण,
संवेदनशीलता का है, अनुपम दर्पण।
जब जन्म लेती हो लड़की के रूप में,
माँ के घर होती हो लक्ष्मी रूप में,
जानी जाती हो तुम I
गुणों की पोटली भर ,कली से कब
कन्या बन जाती हो तुम
पूजन कर, दुर्गा रूप में तुम,
कन्या बन, घर-घर पूजी जाती हो तुम।
वाह रे स्त्री! तेरा यह समर्पण,
संवेदनशीलता का है अनुपम दर्पण।
सद्गुणों से संपन्न कन्या,
अपने बाबुल के ,घर की हो तुम।
छोड़ बाबुल का घर, सगा-संबंधी,
पति के घर की ,
अर्धांगिनी बन जाती हो तुम।
त्याग की मूरत, प्रेम की ज्योति,
है हर रिश्ते में,
ढूंँढ लेती खुशियांँ हो तुम,
मुश्किलों को सरल कर,
हर काम आसान बनाती हो तुम।
वाह रे स्त्री! तेरा यह समर्पण,
सहनशीलता का है ,अनुपम दर्पण।
विलुप्त हो जाता नाम तुम्हारा,जाति,
गोत्र,पति के नाम से जानी जाती हो तुम,
माँग तुम्हारा ,नाम पति का भर्ती तुम,
हाथ तुम्हारा, चूड़ी पति के नाम का,
कोख में पालती बच्चे को तुम,
बच्चे पति के नाम का,
वाह रे स्त्री! तेरा यह समर्पण,
सहनशीलता का है ,अनुपम दर्पण।
हर किसी की खुशी,और ख्वाहिश को,
पहचानकर, पूरा करती हो तुम,
तेरे बिना अधूरी है ,सृष्टि।
रिश्तों को जोड़ती हो तुम,
मुश्किलों से लड़ती हो ,
हर मकान को घर बना देती हो तुम,
वाह रे स्त्री! तेरा यह समर्पण,
सहनशीलता का है अनुपम दर्पण।
“करना नारी का सम्मान
उससे बढ़ेगा तेरा मान “
–सुनीता कुमारी (विज्ञान शिक्षिका), बेंगलूरु
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नारी शक्ति
सावित्री रूप में नारी यमराज से टकराई थीं,
पुरुषोत्तम श्री राम को, सीया ही बनाई थीं!
शक्ति के बिना महादेव! ध्यान में रहते हैं मग्न,
नारायण लक्ष्मी संग ही चलते हर-एक कदम!
हर कदम पर नारी को देवों ने सम्मान दिया,
पुरुषों ने इंद्र और गौतम को ही याद किया!
अबला नारी ये शब्द आखिर क्यों लाया गया?
नारी को अबला आखिर क्यों बनाया गया?
जब नारी ने अपनी शक्ति को पहचान लिया
फिर तो कूल्टा बोल नारी को बदनाम किया।
आंखों में जब हया थी, तन में थी पवित्रता
बौने नहीं समझें अहिल्या,सीता की पवित्रता।
चपल बेटियां चल रही,उन पुरुषो के पथ पर
जो स्त्री त्यागते रहें, अप्सराओं के श्रृंगार पर।
कुछ भी कहो कालचक्र सदैव बदलते रहता है
आखिर में अहंकार का अंत, अंततः पक्का है।
वक्त बदल गया है, से नर स्वयं में सुधार करों
अन्यथा तजे जाओगे स्वयं का कर्म याद करों।
सदियों से बोया बबुल तो आंवला कहां पाओगे
नारी को सम्मान देकर ही सम्मान आप पाओगे।
-सुनीता मिश्रा, देहरादून
One Comment
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Bhut khub likha hai Sunita Mishra ji aapne nari shakti ke baare me🙏