सुनीता कुमारी
प्राचीन समय में विद्या अध्ययन गुरुकुल में होता था l इसमें बच्चों को खुले में प्रकृति के साथ जोड़कर, ज्ञान दिया जाता था I उस समय कोई ई-बुक नहीं होती थी I सभी ज्ञान को इन्द्रियों के माध्यम से,स्पर्श कर,देखकर,सुनकर,बोलकर तथा अनुभवों के आधार पर कौशल अर्जित किया जाता था I
पर्यटन शब्द दो शब्दो के मिलने से बना है ‘परि’ का अर्थ है चारो ओर तथा ‘ तन ‘का अर्थ है चलना या भ्रमण करना अर्थात भ्रमण कर अनुभव हासिल करना I पर्यटन सिर्फ भारत के लोग ही नहीं करते हैं,Iयह विश्व स्तर पर किया जाता है पर भारत का पर्यटन विश्व व्यापी है,क्योंकि भारत अकेला ऐसा देश है,जो विभिन्नता में एकता के लिए प्रसिद्ध है ,जहाँ पर्यटक को कम समय में अधिक जानकारी प्राप्त हो जाता है ,जैसे- यहाँ की विभिन्न प्राकृतिक छटा,ऐतिहासिक धरोहर,सांस्कृतिक परिवेश तथा विभिन्न वेश- भूसा पर्यटक को आकृष्ट करती है I
अभी भी भारत की पढ़ाई में प्राचीन अंश जुड़ा है,जो बच्चों का मानसिक विकास में सहायक है, आज भी मेला,धार्मिक, यज्ञ आदि का आयोजन प्राचीन समय से चलता आ रहा है, जिसको लोग दूर-दूर से देखने आते हैं I पर्यटन का उदेश्य शिक्षा, मनोरंजन, आध्यात्मिकता, व्यापार, तथा शांति होता है I
कहा जाता है कि “जो पर्यटन करते हैं वो कई किताब हैं, और जो नहीं करते हैं वो पन्ने मात्र हैं I “
पर्यटन बच्चों के विकास में उपयोगी साबित होता है, जो इसमें शामिल होते हैं उनके सोचने की क्षमता का विकास होता है,देखने, सुनने,किसी चीज़ को जानने की जिज्ञासा बढ़ती है,,मन को शान्ति मिलती है, बाद-विवाद की स्पर्द्धा बढ़ती है, तथा पर्यटन के दौरान देखी गई चीजें चिरन्त काल तक स्मरण में रहती हैI इस प्रकार पर्यटन बुद्धि लब्धि या इंटेलिजेंस कोशेंट यानी आई क्यू बढ़ाने में सहायक होता है।
भारत सरकार जिस तरह से पर्यटन को बढ़ावा दे रही है ,”अतिथि देवो भव” भारत को विश्व व्यापी बना रही है I जिससे भारत का अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो रही है I
मेरा मानना है कि इसी अर्थव्यवस्था के कुछ हिस्से को व्यापक रूप से विद्यार्थियों के पर्यटन में खर्च किया जाए I चाहे वे बच्चे, सरकारी स्कूल के हों या प्रायवेट स्कूल के हों, सभी बच्चों को पर्यटन का बराबर लाभ मिल सके I उनके विकास में सहायक हो सके Iआज के सभी बच्चे भारत के भविष्य हैं इसपर सभी को विचार करने की जरूरत है I चलते चलते किसी शायर ने ठीक ही कहा है-
“सैर कर दुनिया की गाफिल, जिंदगानी फिर कहाँ;
जिंदगानी गर रही तो नौजवानी फिर कहाँ!”
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आपके स्कूल वाले पर्यटन की बात से मै सहमत हूँ।