“जब सब उसे मूर्ख समझ बैठे… उसी बच्चे ने खोला सबसे बड़ा सच!”
आश हम्द, पटना (बिहार)
सारांश:
पूरे गाँव में मूर्ख कहा जाने वाला छोटा सरजू चुपचाप तय करता है कि वह सच साबित करेगा। अचानक प्रकट हुए एक साधु महाराज पर उसे शक होता है, जिसे कोई और गंभीरता से नहीं लेता। सत्य उजागर करने की हिम्मत वही करता है जिसे कोई भरोसे लायक नहीं समझता—और पूरा गाँव दंग रह जाता है।केसे? यह जानने के लिए पूरी स्टोरी पढ़िए दिल थाम कर—
…लेकिन सरजू को साधु महाराज पर संदेह हो रहा था, इसलिए वह उन पर नज़र रखने लगा।
दिन में कुछ ऐसा वैसा नहीं देखा, और रात को सरजू घर से निकल नहीं पा रहा था। परंतु एक रात हिम्मत करके माँ-बापू के सोने के बाद सरजू अपने घर से निकल पड़ा। जब वह साधु महाराज की झोपड़ी के पास पहुँचा तो रात के बारह बजने वाले थे। सरजू झोपड़ी के पीछे की छोटी सी खिड़की से देखने की चेष्टा करने लगा। देखा तो उनके साधु ने गेरुआ वस्त्र बदलकर साधारण वस्त्र धारण कर लिए, फिर झोपड़ी से निकलकर वह सीधा शराब के अड्डे पर जा पहुँचा।
वहाँ उसने चिकन मटन ख़ूब खाया, शराब पिया और वापस चला गया।
सरजू का शक सही था। लेकिन इस सच को साबित कैसे करें ? क्योंकि सभी उसे मूर्ख समझते थे और कोई उसकी बात पर यक़ीन करके रात को यह सब देखने नहीं आता, इसलिए सरजू प्रातः काल होते ही सीधा अपने विद्यालय के गुरुजी के पास गया और उन्हें सारी बात बताई। पहले तो उन्हें यक़ीन नहीं आया, लेकिन सरजू के यह कहने पर कि – “ मैं अपनी बात साबित कर सकता हूँ। आप मुझे सिर्फ़ एक मौक़ा दीजिए और रात को मेरे साथ चलिए ।” गुरुजी ने उसकी बात मान ली। फिर गुरुजी ने गाँव के और कुछ लोगों को भी अपने साथ ले लिया और सरजू की बताई जगह पर पहुँच गए।
साधु महाराज वहाँ पहले से ही अपनी मौज-मस्ती में लगा था, जिसे देखकर लोगों का गुस्सा उबल पड़ा। फिर सबने उस पाखंडी को उसी समय पुलिस के हवाले कर दिया। जिस सरजू को सब मूर्ख समझते थे, आज उसी की बुद्धिमानी के कारण सभी गाँव वाले और ठगे जाने से बच गए थे। सबने उसको शाबाशी दी और फिर कभी किसी ने उसका मज़ाक नहीं उड़ाया…..
कहानी की सीख
इस तरह एक पाखंडी साधु महाराज की धोखाधड़ी उजागर हुई, और गाँव वालों ने यह सीख ली कि अंधविश्वास से ऊपर उठकर सच्चे ज्ञान और मेहनत पर भरोसा करना चाहिए। और कभी किसी को अपने से कमज़ोर और मूर्ख नहीं समझना चाहिए…..
(काल्पनिक रचना)