“ज़िंदगी सिर्फ खर्चों का हिसाब नहीं—एसेट्स, उम्मीद और परिवार के भरोसे से चलने वाली एक यात्रा है।”
प्रस्तुति: शिखा तैलंग, भोपाल
शैलेश तिवारी एक साधारण भारतीय मध्यमवर्गीय परिवार का आदमी था। उम्र लगभग पैंतालीस, पत्नी कुसुम और दो बच्चे—रिया (12 साल) और अथर्व (16 साल)। उसके पिता, हरिदास तिवारी, अब उम्रदराज़ थे और दवाईयों पर निर्भर रहने लगे थे।
बाहर से देखने पर सब कुछ सामान्य लगता था—सुबह ऑफिस, शाम को घर, बच्चों की पढ़ाई, EMI का दबाव, और वीकेंड पर कभी-कभार बाहर का खाना। लेकिन अंदर ही अंदर शैलेश एक बड़े सवाल से जूझ रहा था —
“मेरी ज़िंदगी आखिर किस हिसाब-किताब पर चल रही है?
और मैं किस दिशा में जा रहा हूँ?”
एक दिन रविवार की सुबह, घर का बजट बनाते-बनाते वह अचानक बोला—
“कुसुम, कभी तुम्हें लगा है कि हमारी पूरी लाइफ़ बस एक हिसाब-किताब बनकर रह गई है?”
कुसुम ने हँसते हुए कहा—
“अरे तो और क्या?
दूध के पैसे, बच्चों की फीस, बिजली का बिल, सिलिंडर की बुकिंग—
ये सब तो चलना ही है!”
लेकिन शैलेश कुछ गहरे विचार में था।
कुसुम ने महसूस किया—
“कुछ सोच रहे हो?”
शैलेश ने धीरे से कहा—
“हाँ… सोच रहा हूँ कि ज़िंदगी का असली पहिया तीन चीज़ों पर चलता है—
Assets, Liabilities और Risk।
हम इन्हीं में उलझे रहते हैं।”
कुसुम ने भौंहें चढ़ाईं—
“अरे, ये क्या नई थ्योरी ले आए?”
“नहीं, ये आज सुबह समझ आया। सुनोगी?”
कुसुम उत्सुक हो गई—
“चाय बनाकर लाती हूँ, फिर आराम से सुनाओ।”
1. एसेट्स – यानी आपकी कमाई की ताकत
शैलेश ने अपनी नोटबुक उठाई।
रीया और अथर्व भी पास आकर बैठ गए।
“देखो, सबसे पहले आते हैं ऐसेट्स।
Assets मतलब सिर्फ पैसा नहीं होता—
बल्कि हमारी कमाने की क्षमता… यानी कौशल, नौकरी, व्यापार, प्रतिभा, सोच और स्वास्थ्य।”
अथर्व बोला—
“मतलब पापा, मेरी पढ़ाई भी एसेट है?”
“बिलकुल बेटा! तुम्हारी पढ़ाई, तुम्हारी स्किल—ये सब एसेट हैं।”
रीया ने पूछा—
“और मम्मी के?”
कुसुम मुस्कुराई—
“अरे मेरे कौन से एसेट?”
शैलेश ने तुरंत कहा—
“कुसुम, तुम्हारी कुकिंग स्किल एसेट है, तुम्हारा घर मैनेज करना एसेट है, तुम्हारा लोगों से मिलना-जुलना एसेट है, और तुम्हारी बुद्धि तो सबसे बड़ा एसेट है।”
कुसुम की आँखें चमक उठीं—
“सच?”
“सच में! अगर तुम चाहो तो होममेड पापड़-अचार का छोटा बिज़नेस शुरू कर सकती हो।”
कुसुम कुछ देर चुप रही।
उसे पहली बार लगा—शायद उसके अंदर भी कमाई की शक्ति छिपी है।
शैलेश ने घरवालों को समझाते हुए कहा—
“देखो, ऐसेट्स ऐसे होते हैं—”
- नौकरी या पेंशन – जैसे मेरी सरकारी नौकरी।
- लेखन या कला – किसी की लेखन क्षमता एसेट है।
- गाँव में पड़ी ज़मीन – जिसे बेचकर या किराये पर देकर आय हो सकती है।
- गाय-भैंस का दूध – गाँवों में बड़ा एसेट है।
- सोना-चाँदी – बुरे वक्त में काम आता है।
- स्किल – जैसे कंप्यूटर, सिलाई, ब्यूटी पार्लर, डेटा एंट्री, योग प्रशिक्षण।
- छोटा बिज़नेस – किराना, टिफिन सेवा, ऑनलाइन बिक्री इत्यादि।
कुसुम ने कहा—
“मतलब जो चीज़ पैसे बनाने में मदद करे वही एसेट!”
“बिलकुल!”
क्रमश: