“जब सब उसे मूर्ख समझ बैठे… उसी बच्चे ने खोला सबसे बड़ा सच!”
आश हम्द, पटना (बिहार)
सारांश:
पूरे गाँव में मूर्ख कहा जाने वाला छोटा सरजू चुपचाप तय करता है कि वह सच साबित करेगा। अचानक प्रकट हुए एक साधु महाराज पर उसे शक होता है, जिसे कोई और गंभीरता से नहीं लेता। सत्य उजागर करने की हिम्मत वही करता है जिसे कोई भरोसे लायक नहीं समझता—और पूरा गाँव दंग रह जाता है।केसे? यह जानने के लिए पूरी स्टोरी पढ़िए दिल थाम कर—
बहुत समय पहले की बात है। एक छोटे से गाँव में एक परिवार रहता था। श्याम उसकी पत्नी गीता और उनका दस वर्ष का बेटा सरजू। गाँव भर में मशहूर हो गया था कि श्याम और उसकी पत्नी तो काफी समझ-बूझ रखने वाले हैं, अनपढ़ होने के बावजूद।
जबकि सरजू विद्यालय भी जाता है और विद्यालय के बाद मास्टर जी से एक्स्ट्रा क्लास भी लेता है फिर भी मंदबुद्धि ही रह गया।
बेचारा सरजू काफी परेशान रहने लगा था। बाहर खेलने जाता तो कोई भी बच्चा उसके साथ खेलने को राजी नहीं होता, उल्टा सारे बच्चे मिलकर उसका मज़ाक उड़ाकर उस पर हँसने लगते। वह रोता हुआ घर लौट आता।
एक दिन ऐसे ही रोते-रोते उसने निश्चय कर लिया कि चाहे कुछ भी करना पड़े, वह साबित करके रहेगा कि वो मूर्ख नहीं है। लेकिन कैसे ? यही सोचते सोचते वो सो गया।
एक दिन की बात है। सरजू किताबों का बस्ता उठाए विद्यालय जाने के लिए घर से निकला। कुछ ही आगे जाने पर देखा है कि पुराने बरगद के पेड़ के नीचे बहुत से लोगों के भीड़ लगी है। उत्सुकतावश सरजू भी उस भीड़ में जाकर देखने का प्रयास करने लगा कि, आख़िर हो क्या रहा है ! देखा तो वहाँ एक साधु महाराज आँख बंद किए मंत्र जाप कर रहे थे और सारी भीड़ हाथ जोड़े खड़ी थी। सरजू भी वहीं खड़ा हो गया और भूल गया कि वह विद्यालय जाने के लिए निकला था।
अचानक साधु महाराज ने आँखें खोलीं और भीड़ पर एक नज़र डालकर बोले – “ कहो बच्चा, क्या समस्याएं हैं आपकी ?”
साधु महाराज का इतना कहना था कि हर कोई अपनी-अपनी समस्याएं बताने लगा। परंतु किसी ने भी यह जानने का प्रयास नहीं किया कि रातों-राधे साधु महाराज कहाँ से प्रकट हो गए ! उधर साधु महाराज दावा कर रहे थे कि –
“ मैं साधना से आत्मज्ञान प्राप्त कर चुका हूँ, और मेरे पास जो आएगा उसके सारे दुःख दूर हो जाएंगे ।”
भोले भाले गाँव वाले उनकी बातों में आ गए और हर कोई अपनी समस्या बताने के बाद दान पेटी में कुछ ना कुछ ज़रुर डाले जा रहा था। खाने-पीने की सामग्री के साथ-साथ साधु महाराज को वस्त्र, मोती माला से लेकर सोने चाँदी भी चढ़ाए जाने लगे थे। सरजू के गाँव के साथ-साथ आसपास के गाँव के लोग भी आने लगे थे। लेकिन सरजू को साधु महाराज पर संदेह हो रहा था, इसलिए वह उन पर नज़र रखने लगा।
क्रमश: