“संघर्ष की अग्नि से निकला वह महान व्यक्तित्व, जिसने भारत को समानता का संविधान दिया।”
सुनीता कुमारी, बैंगलोर
महान पुरुष वो होते हैं,जो कष्टों की खड्गधार पर चलते हुए,अपने आदर्श के दीप को बुझने नहीं देते हैं। जो पीड़ाओं का
विषपान शंकर की भांति किया तथा औरों के लिए संविधान रुपी अमृत कलश छोड़ गए। ये थे सच्चे महापुरुष बाबा साहेब
भीमराव अंबेडकर । इनकी135 वीं जयंती,14अप्रैल को मनाई गई। इसी उपलक्ष्य पर दो शब्द लिखने का मौका मिला
है जो कुछ इस प्रकार है –
बाबा साहब अंबेडकर को संविधान का निर्माता,समाज सुधारक,अर्थशास्त्री,महिलाओं,श्रमिकों पिछड़ों वर्गों
के अधिकार के लिए लड़ने वाले नेता के रूप में जाने जाते हैं ।
बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का जन्म14अप्रैल 1891 को ब्रिटिश काल में, भारत के
मध्य प्रदेश में स्थित महू नगर,सैन्य छावनी में हुआ था।ये राम जी मालोजी सतपाल और भीमाबाई की चौदहवीं वअंतिम
संतान थे। इनका विवाह 1906 में रमाबाई अंबेडकर से संपन्न हुआ। 1936 में पहली पत्नी का निधन हो गया। बाबा साहब
कई बीमारी से पीड़ित थे।अपनी देखरेख के लिए इन्होंने एक डाक्टर रखा जो बाद में इनकी दूसरी पत्नी बनी, जिनका नाम
सविता अंबेडकर तथा बेटे का नाम यशवंत अंबेडकर था।
इनका परिवार कबीर पंथ को मानने वाला मराठी मूल का था और ये वर्तमान में महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में आंबडवे
गांव के निवासी थे। डॉ भीमराव अंबेडकर जाति के दलित थे ।इस कारण उन्हें अछूत माना जाता था।उनका बचपन बहुत
ही मुश्किलों में व्यतीत हुआ था ,बाबासाहेब आंबेडकर सहित सभी निम्न जाति के लोगों को सामाजिक बहिष्कार,अपमान
और भेदभाव का सामना करना पड़ता था।
वे जन्मजात प्रतिभा संपन्न व्यक्ति थे।तमाम बाधाओं के बावजूद उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और मुंबई
विश्वविद्यालय,कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल आफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की।
इनका सामाजिक और राजनीतिक कार्य अक्षुण्ण है। इन्होंने छुआछूत के विरुद्ध लगातार काम किया तथा सत्याग्रह का
नेतृत्व किया। बाबा साहब अंबेडकर तथा मदन मोहन मालवीय ने 1932 में पूणा पैक्ट के माध्यम से उन्होंने शोषित वर्गों
के लिए आरक्षण का प्रावधान किया।
1935 में उन्होंने स्वतंत्र लेबर पार्टी की स्थापना की । वह स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री बने तथा वे संविधान सभा
मसौदा समिति के अध्यक्ष तथा भारत के संविधान के मुख्य रचयिता बने।
अपने अंतिम समय में उन्होंने हजारों अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया। इन्होंने 6 दिसंबर1956 को
अंतिम सांस ली। उन्हें 1990 में मरणोपरांत भारत रत्न मिला। अंबेडकर जयंती को समानता दिवस के रूप में मनाते हैं।इस
दिन बाबा साहब के संघर्ष,शिक्षा,न्याय के लिए किए गए कामों को याद किया जाता है।आज के समय में अंबेडकर जयंती
के मौके पर में दिल्ली तथा भारत के अंदर शहरों में बाबा साहब की प्रतिमा पर माला
अर्पण करते हैं।
बाबा साहब का संदेश था ;”शिक्षित बनो,संगठित रहो और संघर्ष करोt”;यह अनोखी बातें कसौटी पर कसी हुई है व उनके
द्वारा अजमायी हुईं है। इसलिए हमलोगों का कर्तव्य बनता है कि भारत की संविधान की सुरक्षा करें।यह भारत की धरोहर
है।हर एक भारतीय शिक्षित बने, संगठित होकर रहें और हर अच्छी चीजों को पाने के लिए संघर्षरत रहें।तभी भारत को
पुनः इनके जैसा अदि्वतीय पुत्र मिल सकेगा ।
Beautifully written article Suneetha ji