“जिस दर्द को दुनिया ने अनदेखा किया… उसी दर्द ने सीता को अजेय बना दिया।”
आश हम्द, पटना (बिहार)
सारांश :
एक मासूम पत्नी, जो हर अत्याचार सहकर भी चुप रही… पर अपनी बेटी पर उठा हाथ उसके जीवन की सबसे बड़ी क्रांति बन गया। दहकते अतीत, टूटती उम्मीदों और अनकहे जख़्मों के बीच—सीता अकेले दो बच्चों के साथ एक अनजान शहर में नई लड़ाई शुरू करती है। सालों की गुमनाम तपस्या के बाद जब वह सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ती है, तो सस्पेंस यही है—क्या वह अतीत को माफ करेगी या उसी की राख पर अपनी नई दुनिया बनाएगी? आइए, विस्तार से जानें इस भावनात्मक पारिवारिक कहानी के जरिए—
…“ राम, तुम्हें पता है मैंने यह इतने सारे दिन रात तुम्हारे बगैर किस तरह से गुज़ारे हैं ?”
सीता ने अपनी बात शुरू ही की थी कि राम बोल पड़ा –
“ हाँ सीता, मुझे भी तुमसे बात करनी थी ।”
“ क्या ? बोलो ना !”
“ मेरे जाते ही तुम मेरे घर वालों से अपना बर्ताव क्यों बदल लेती हो ?”
“ यह तुमसे किसने कहा ?”
सीता ने पूछा।
“ किसी ने भी कहा हो, उससे क्या फ़र्क पड़ता है। माना कि, मैं माँ का सौतेला बेटा हूँ जिसकी वजह वो मुझे ज़्यादा पसंद नहीं करतीं लेकिन फिर भी तुम्हें क्या ज़रूरत है बार-बार उनको इस बात के लिए ताना देने की ? बोलो ! बताओ !”
राम की बात सुनकर सीता हैरान रह गईं। फिर वह कुछ बोल ही नहीं पाई। सारी बातें तो उसकी सास कर चुकी थी, बचा है क्या था अब कहने को ! अब कुछ भी कहती तो राम मानने वाला तो था नहीं समझदारी इसी में थी कि चुपचाप रहे, वरना पति की नज़रों में भी बुरी बन जाएगी।
सीता ने सोच लिया था कि अब जो करना है उसे ख़ुद ही करना है। ऐसे ही समझौता संघर्ष करते-करते सीता ने पाँच साल वहीं उसी घर में गुज़ार दिए। अब तो सास ननंद दोनों की हिम्मत इतनी बढ़ गई थी कि उस पर हाथ भी उठाने लगी थीं। जब पति ही बेपरवाह हो जाए, सुनी सुनाई बातों पर यक़ीन करता हो और पत्नी की बात को सुनकर भी अनसुना करता हो, देखकर भी अनदेखा करता हो तो फिर ऐसी औरत पर हर कोई अपना हुकूम चलाना चाहता है। अपनी मिल्कियत समझता है। इन पाँच सालों में और कुछ तो नहीं मगर ये हुआ था कि सीता के गोद में दो बच्चे आ गए थे। बड़ी बेटी रौशनी तीन साल की और बेटा राजू एक साल का हो गया था। सीता ने अपना सुकून अपने बच्चों में ही ढूँढ लिया था।
एक दिन दोपहर के समय सीता सबके लिए खाना लगाने में बिज़ी थी कि तभी उसकी बेटी रौशनी रोती हुई आई –
“ क्या हुआ बेटा ! क्यों रो रही हो ऐसे ?”
क्रमश: