“आस्था, जीवन, प्रेम और उसूलों से सजी संवेदनाओं की काव्य यात्रा”
शबनम मेहरोत्रा, कानपुर
सारांश
शबनम मेहरोत्रा की कविताएँ जीवन के हर आयाम को छूती हैं—कभी माँ नर्मदा की भक्ति, तो कभी धर्म और उसूलों पर गहन चिंतन। इनमें प्रेम की चाहत, स्त्री-स्वभाव की जटिलता, प्रभु पर समर्पण और आत्मिक साधना का मधुर स्वर झलकता है। सरल, भावपूर्ण और हृदयस्पर्शी भाषा में रची गई ये रचनाएँ पाठक के मन को भक्ति, प्रेम और आत्मचिंतन से जोड़ती हैं। आइए आनंद लें इन दिलकश कविताओं का—
माँ नर्मदा
भारत में ही बहना सदा
मोक्ष दायिनी माँ नर्मदा
अमरकंटक से माता तेरा
होता है तेरा उदगम
पाप को धोने, पुण्य को पाने
तुम माते हो गंगा सम
पुष्प हल्दी कुमकुम दीप से
तुम प्रसन्न हो जाती हो
फिर भक्तो के कष्ट निवारण
को प्रतक्ष आ जाती हो
भक्तों से नही होती जुदा
मोक्ष दायिनी माँ नर्मदा
भारत में ही रहना सदा
ओंकारेश्वर तेरे तट विराजे
ममलेश्वर महादेव भी साजे
शबनम क्या तेरी महिमा गाए
ऋषि मुनि भी न कर पाए
कृपा मिले माँ तेरी सर्वदा
मोक्ष दायिनी मानर्मदा
भारत में ही बहना सदा
^^^^^^^^^^^^^^^^
उसूल
मेरी ज़िंदगी का उसूल सबका मंगल हो
प्यार से समुचित अभिवादन स्वीकृत हो
भक्ति संबंध बौद्धिक क्षमताओ से प्रभावित न हो
धार्मिकता नहीं भक्ति स्वयं में एक सम्पूर्ण धर्म हो
धर्म का अभिप्राय कर्तव्य बोध से क़बूल हो
मेरे मंतव्य से पुरुषार्थ धर्म,अर्थ,काम,मोक्ष हो
धर्मों की लौकिकता एवं पारंपरिकता भिन्न भिन्न न हो
आध्यात्मिकता न हो पुनर्जन्म मान्यता मेरी मौक्ष की हो
नैतिकता यही सभी धर्मों और धार्मिकता में समानता हो धर्म कर्तव्य बोध हो काम का अर्थ कामुकता कतई न हो
काम अभिप्राय कामना रहित जीवन श्रेष्ठ परिचायक हो
मोक्ष का मतलब स्वर्ग प्राप्ति नहीं मोह का क्षय होना हो
मेरी भक्ति किसी ज्ञान और मुक्ति की मोहताज न हो
क़बूल न हो भक्ति जो अंदर अनुराग उत्पन्न करती हो
उसूल निश्चल प्रेम हो क़बूल अनुराग का स्वरूप हो
अस्तु अनुराग विवेक उत्पन्न हो यही जीवन का उसूल हो
^^^^^^^^^^^^^^^^
देवत्व
मनुष्य,ऋषि या देवता नहीं कर पाया अनुमान
तिरिया चरित्र न जान सका खुद से भी भगवान
सारे देवत्व खो गए तनिक हुआ न कुछ भी भान
शांभ रूप से कृष्ण पत्नियों की भावों का संज्ञान
बहुत जटिल है इन अबला को सच्चे में समझ जाना
कभी वो वर्षा कभी वो अग्नि खुद जलना जलाना
समझ के नारी को कोई भी पा न सका देवत्व
भ्रम में जी जी कर ये जग पा जाता है मृत्युत्व
ब्रह्मा,विष्णु नारद और स्वयं भ्रमित हुवे महादेव
नारी को जो जानना चाहो मारो पांव पर छेव
^^^^^^^^^^^^^^^^
प्रभु
जीवन पथ पर निकल पड़ी हूँ हे प्रभु पथ प्रदर्शन दो
अपने कर्म से विमुख न होऊँ ऐसा भाव समर्पण दो
कर्म के पथ पर धैर्य न खोऊँ
दुष्कर्मों के कोई बीज न बोऊँ
भूल से ऐसा कर्म नही कर दूँ
अंत समय तक जिससे रोऊँ
जग जिससे मेराअपना बन जाए वाणी में आकर्षण दो
बोझ बढ़ा है जब जब मुझपर
ढाल दिया है हमने ही तूझपर
अब तक जैसे तुमने संभाला
आजा अपने कदम बढ़ा कर
तेरे दर से जाए कहाँ ये शबनम आके दर्शन दो
अपने कर्म से विमुख न होऊँ ऐसा भाव समर्पण दो
^^^^^^^^^^^^^^^^
चाहत
तेरी चाहत की आदत ये कैसे लगी
सोच कर मैं तो ज़्यादा परेशान हूँ
शाम ढलने लगी,रात होने लगी,
मेरा बेताब दिल क्यों अनजान है
ख्वाहिशें तुमसे मिलने को
बेताब है
कैसे रोकूँ मेरा दिल ही तो ये
शादाब है
रोकना चाहूँ तो पाँव रुकते नहीं
मोह का मेरे शायद ये फरमान है
बीते कल को मैं कब का
भुला भी गई
धुंधली तस्वीर जो थी मिटा
भी गई
अब तो लगता है तुझसे मेरे हम
सफ़र, तू मेरी और मै तेरी जान हूँ
सोच कर मैं अभी से ही
शर्माती हूँ
जब मिलेंगे हम ये सोच
घबराती हूँ
अब तो शबनम की भी आरज़ू बढ़ गई,
अब तो तू सुर मेरा मै तेरी तान हूँ
तेरी चाहत की आदत ये कैसे लगी
सोच कर मैं तो ज्यादा परेशान हूँ
^^^^^^^^^^^^^^^^
मुझे मिल गया बहाना तेरी दीद का (पैरोडी)
मुझे मिल गया खजाना मेरे मीत का
ऐसा प्रेम लेके आया श्याम प्रीत का । मुझे मिल गया खजाना मेरे मीत का,,,
वृंदावन की कुंज गली में
फूलो में और बंद कली में
आज मिला प्रेम ऐसा,प्रेम ऐसा आज मिला सोचूं न अतीत का,,,,मुझे मिल गया खजाना
तोड़ के सारे जग के बंधन
छोड़ दिया है घर ओर आंगन
तुमसे ऐसी नेह लगी,नेह लगी तुमसे ऐसी
होश नही रीत का,,,,मुझे मिल गया,,,,
आने वाला कल क्या होगा
वर्तमान जो होना होगा
सोच नही कोई मेरी,मेरी कोई सोच नही
नीत न अनीत का,,,मुझे मिल गया खजाना मेरे मीत का
One Comment
Comments are closed.
Bahut khub!! Umda!