सुनीता मिश्रा,देहरादून
“श्रृंगार और प्रेम की मधुर छवि – भावनाओं से भीगी सुगंधित कविताएं।”
सारांश :
इन कविताओं में बारिश के मौसम और हरियाली का अलौकिक उत्सव जीवंत हो उठता है।
एक ओर सुहागिनें सोलह श्रृंगार कर भोले-गौरा से मंगलकामना करती हैं, तो दूसरी ओर पिया की प्रतीक्षा में प्रेयसी का मन विरह से व्याकुल है। श्रृंगार, सावन और प्रेम की भावनाएं इन रचनाओं को और अधिक अनुपम बना देती हैं।आइए हृदयस्पर्शी और मन को गुदगुदाने वाली इन कविताओं का आनंद लें—
सोलह श्रृगार
आई हरियाली तीज है चलों करें
सोलह श्रृंगार सखी,
पावन सावन आया है प्रकृति भी है
सजी-धजी सखी।
देवालयों में धूम मची भोले की
जय-जयकार गूंज रही,
हर हाथ में हरी-हरी चूड़ियां कमर में
चुनरी भी हरी-हरी।
हाथों में रच गई मेहंदी आज पैरों में
महावर लगी हुई,
माथे की बिंदिया चांद-सूरज सा
दमक-चमक से भरी हुईं।
कर सोलह श्रृंगार सज-धज सुहागिनें
टोली में मंगल गा रही,
अपने साजन की लम्बी उम्र की वर
शिव-भोले से मांग रहीं।
बाजारों की दुकानें हर तरफ मीठी घेवर
से खूब सजी हुई
मायके की सौगातें भी हरे-हरे श्रृंगार से
सजी-धजी हुईं।
करके सोलह श्रृंगार सखियाॅं सब बागों
में झूला डाल रही,
अंखियों में पिया की प्रीत की सुंदर
स्वप्न सजाएं गा रहीं।
मंद-मंद मुस्काए भोले सखियों पर स्नेह
बरसाए रहें हैं,
माॅं गौरा भी आंचल से प्रेम-स्नेह
की बारिश बरसा रही हैं।
ओम नमः शिवाय की ध्वनि वातावरण
में खूब समाई है।
भोले और मैय्या के आशीषों से सावन
में खूब हरियाली छाई हैं।
ओम नमः शिवाय! ओम नमः शिवाय!
आज हर अधर की भाषा है।
हरियाली तीज में सजना है हर सुहागान
की अभिलाषा है।
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साजन
प्रेम कि मैं पुजारन तू है मेरा चित चोर
तेरे प्रेम की बारिश में मनवा भींगे मोर
नित्य नयनों में सपने पिया मैं सजाती
आए ना सजना अखियां लोर बहाती
सावन की हरियाली फूल खिले चारों ओर
नयना मेरी तुम्हें ढूंढे अंखियां में लिए लोर।
नदिया उफान मारे रोज बहे पुरवइया
तैरू या डूब जाऊ समझ पाऊ ना सैयां
बादलों की भूल-भुलैया बारिशों की शोर
सुना आंगन देख चंदा शिकवा करता रोज।
तुमसे ही शुरू मेरी प्रेम की कहानी
तुमपे ही खत्म हो,पिया मेरी जिंदगानी
सावन की हरियाली धरा सजी हर ओर
मेरी अखियां तुमको ढूंढे हैं चारू ओर
सावन मैं सज गई पिया, देखो दुपहरिया
सखिया सब झूला संग करे अटखेलियां
मैं बिरहा की मारी बाट देखूं पिया रोज
आए ना साजना अंगना घटा बरसें घनघोर।
सावन की हरियाली फूल खिले चारों ओर
नैना मेरी तुमको ढूंढे ,अखियां में लिए लोर।
One Comment
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बहुत बहुत आभार आपका इतने उम्दा लेखन के लिए।