प्रथम पूजनीय देव की जनप्रिय कहानियां
(AI GENERATD CREATION)
प्रस्तुति: शिखा तैलंग, भोपाल
चंद्रमा का अभिमान
“दूसरों की कमजोरी पर हँसने वाला भूल जाता है कि समय किसी को भी आईना दिखा सकता है।”
एक बार गणेश जी किसी उत्सव से लौट रहे थे। उनके हाथ में मोदक थे और वे अपने मूषक पर सवार थे।
रास्ते में मूषक अचानक एक साँप को देखकर घबरा गया। वह लड़खड़ा गया और गणेश जी नीचे गिर पड़े।
गणेश जी उठे और शांत भाव से अपने वस्त्र ठीक करने लगे।
चंद्रमा ने यह दृश्य देखा और गणेश जी के रूप पर हँसने लगा।
गणेश जी को यह व्यवहार अच्छा नहीं लगा। उन्होंने कहा, “किसी के शरीर या रूप का मज़ाक उड़ाना उचित नहीं है।”
चंद्रमा को अपने सौंदर्य पर बहुत अभिमान था। उसे लगा कि उसका रूप उसे दूसरों से श्रेष्ठ बनाता है।
गणेश जी ने उसे समझाया कि सुंदरता स्थायी नहीं होती। वास्तविक सुंदरता व्यक्ति के व्यवहार और उसके हृदय में होती है।
चंद्रमा को अपनी भूल का अहसास हुआ। उसने गणेश जी से क्षमा माँगी।
गणेश जी ने उसे क्षमा कर दिया।
यह कथा हमें बाहरी रूप के बजाय मनुष्य के व्यवहार को महत्व देना सिखाती है।
शक्तिशाली संदेश:
किसी की कमजोरी पर हँसना वीरता नहीं है। सच्ची महानता दूसरों को सम्मान देने, उनकी भावनाओं को समझने और अपनी भूल स्वीकार करने में है।
(क्रमश:)
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