प्रथम पूजनीय देव की जनप्रिय कहानियां
(AI GENERATD CREATION)
प्रस्तुति: शिखा तैलंग, भोपाल
टूटा हुआ दाँत
“कभी-कभी हमारी सबसे बड़ी कमी ही हमारी सबसे बड़ी पहचान बन जाती है।”
भगवान गणेश को एकदंत कहा जाता है—अर्थात जिनका एक ही दाँत है। लेकिन उनके एक दाँत के पीछे त्याग और ज्ञान की अद्भुत कथा जुड़ी है।
कहा जाता है कि एक बार महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की रचना आरंभ करने का निर्णय लिया। उन्हें ऐसा लेखक चाहिए था जो उनके द्वारा बोले जा रहे विशाल ग्रंथ को बिना रुके लिख सके।
उन्होंने गणेश जी से आग्रह किया।
गणेश जी ने शर्त रखी कि वे तभी लिखेंगे जब वेदव्यास बिना रुके श्लोक बोलते रहें। वेदव्यास ने भी एक शर्त रखी कि गणेश जी प्रत्येक श्लोक का अर्थ समझकर ही उसे लिखेंगे।
महाभारत का लेखन आरंभ हुआ।
गणेश जी इतनी तीव्र गति से लिख रहे थे कि अचानक उनकी लेखनी टूट गई। अब वे क्या करते? यदि वे रुकते, तो उनकी अपनी शर्त टूट जाती।
उन्होंने बिना देर किए अपना एक दाँत तोड़ लिया और उसे लेखनी बना लिया।
वेदव्यास बोलते रहे और गणेश जी अपने टूटे हुए दाँत से महाभारत लिखते रहे।
उनका शरीर घायल हुआ, लेकिन उनका संकल्प नहीं टूटा।
आज वही टूटा हुआ दाँत भगवान गणेश की विशिष्ट पहचान है।
यह कथा हमें बताती है कि जीवन में हर नुकसान वास्तव में नुकसान नहीं होता। कभी-कभी कोई कठिनाई हमें ऐसी पहचान दे जाती है, जो हमारी सबसे बड़ी शक्ति बन जाती है।
शक्तिशाली संदेश:
अपनी कमियों से शर्मिंदा मत होइए। यदि आपके भीतर संकल्प है, तो आपकी कमजोरी भी आपकी सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।
(क्रमश:)
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