(마당을 나온 암탉, Madangeul Naon Amtak)
“स्वतंत्रता, मातृत्व और साहस की ऐसी कथा, जो हर उम्र के पाठक के हृदय को छू जाती है।”
पुस्तक समीक्षा: दिविक रमेश, नोएडा
आँगन में इप्स्साक और उसके बत्तख बच्चे को लेकर विरोध होता है। वहाँ रहने वाली मुर्गी का तर्क है कि ‘बत्तख का यह बच्चा कैसे पेंक पेंक बोलकर मुर्गी को माँ कहेगा? मेरे चूजे, ये भी लगातार पूछते रहेंगे कि वह चूजा हमसे अलग क्यों दिखता है।‘ बत्तखों का सरदार किसी तरह बत्तख बच्चे के कमजोर होने का तर्क देकर तथा विसेल के द्वारा शिकार बनाए जाने का भय दिखाकर उन्हें वहाँ ठहरने देने की असफल कोशिश करता है। अंतत: इप्स्साक अपने बच्चे को लेकर आँगन से निकल जाती है। इप्स्साक हिम्मत और सूझबूझ के साथ खुद को और अपने बच्चे को सुरक्षित रखने का हर प्रयत्न करती है।
बत्तख का बच्चा अब बड़ा हो गया है। उसका नाम ‘हरा बाल’ रखा गया है। इप्स्साक को उसे बच्चा कह कर पुकारना पसंद था। ‘हरा बाल’ बिलकुल जंगली बत्तख जैसा दिखने लगा। हरा बाल का झुकाव अब बत्तखों के झुंड की ओर होने लगा। इप्स्साक के न चाहने के बावजूद वह झुंड की ओर चला जाता है। भले ही झुंड के बत्तख उसे महत्त्व नहीं देते। इप्स्साक को हमेशा अपने बच्चे की सुरक्षा की चिंता सताती रहती। खासकर विसेल का शिकार होने की चिंता बहुत सताती। उसका माँ रूप अपने चरम पर था। बत्तख का बच्चा अन्य बत्तखों के व्यवहार से अपमानित भी महसूस करता है और दुखी भी होता है।
आखिर वह अपनी माँ के पास लौटता है और कहता है –“ मैं हर जगह अकेला हूँ। एकदम ऐसे ही जीना पड़ेगा? अब कोशिश करना नहीं चाहता हूँ। मैं समझ गया हूँ कि आपके साथ जब रहता हूँ तो खुश रहता हूँ। इसलिए फिर आपके पास आया हूँ, माँ।“ माँ ने चाहा था कि हरा बाल बत्तखों के बीच चला जाए, लेकिन वह नहीं जाना चाहता था। माँ समझ गई थी कि उसकी शिकायत गुस्से के कारण है।
माँ इप्स्साक ने ‘हरा बाल’ से कहा –“ बिलकुल जाना चाहिए। तुमको नहीं लगता कि अपनी जाति के जंगली बत्तखों के पीछे पीछे जाकर देखना चाइए कि वहाँ दूसरी दुनिया क्या है? अगर मैं उड़ सकती तो यहाँ बिलकुल ही नहीं रुकती। बेटा, तुमको देखे बिना मैं कैसे जी पाऊँगी यह तो मालूम नहीं लेकिन तुम्हारा यहाँ से चले जाना सही है। जाकर अपने झुण्ड का पहरेदार बनो। उनमें किसी के भी कान तुम्हारे जितने तेज नहीं होंगे।“ न चाह्ते हुए भी आखिर ‘हरा बाल’ को अपनी माँ की बात माननी पड़ी। विसेल भी हर समय ‘हरा बाल’ के शिकार के लिए तत्पर रहती क्योंकि वह रात में, पहरेदार के रूप में झुंड का पहरा देता था। इस कारण वह जंगली बत्तख का शिकार भी नहीं कर पाती थी।
इप्स्साक ‘हरा बाल’ को दूर से देख कर संतुष्ट हो जाती। अब कहानी अद्भुत अंत की ओर बढ़ती है। इप्स्साक को एक गुप्त गुफा के अंदर अँधेरे में बहुत छोटे बच्चे एक दूसरे से चिपके रेंगते हुए दिखे। वे अपनी आँख भी नहीं खोल पा रहे थे। वे चार पैर वाले बच्चे थे।वहाँ उनकी माँ या और कोई नहीं था। इप्साक को बहुत चिंता हुई। उसने सोचा कि माँ के बिना तो वे मर जाएँगे। असल में ये बच्चे खतरनाक विसेल के थे।विसेल इप्स्साक के सामने थी। वह बहुत दिनों से भूखी थी। उसकी निगाह हरा बाल और झुंड के शिकार की ओर थी। वह इप्स्साक को परे हटने को कह रही थी। इप्स्साक ने बहादुरी से काम लिया।
उसने विसेल से कहा –‘मैं तुम्हारे बच्चों के पास जा रही हूँ।“ वह चली तो पीछे-पीछे विसेल भी गई। इसके बाद जो हुआ वह बहुत ही अद्भुत था। इप्स्साक ने छोटे-छोटे बच्चों को जकड़ लिया था। यह देखकर माँ विसेल रुआँसी हो गई। उसने इप्स्साक को बच्चों को छोड़ने के लिए विनती की।
क्रमश: