प्रथम पूजनीय देव की जनप्रिय कहानियां
(AI GENERATED CREATION)
प्रस्तुति: शिखा तैलंग, भोपाल
बाधाओं का पहाड़
“बाधाएँ रास्ता रोकने नहीं, हमारी क्षमता जगाने आती हैं।”
एक युवक था, जो हर काम शुरू करने से पहले डर जाता था।
उसे लगता था कि उसके सामने हमेशा कोई न कोई बाधा खड़ी हो जाएगी।
एक दिन वह गणेश मंदिर पहुँचा और बोला, “हे गणेश जी! मेरे जीवन की सारी बाधाएँ दूर कर दीजिए।”
उस रात उसे स्वप्न आया।
उसने देखा कि वह एक विशाल पहाड़ के सामने खड़ा है। पहाड़ के उस पार उसका लक्ष्य था।
वह घबरा गया।
तभी गणेश जी प्रकट हुए।
उन्होंने कहा, “क्या तुम चाहते हो कि मैं यह पहाड़ हटा दूँ?”
युवक ने तुरंत कहा, “हाँ!”
गणेश जी मुस्कुराए और बोले, “यदि मैं हर पहाड़ हटा दूँगा, तो तुम मजबूत कैसे बनोगे?”
युवक चुप रहा।
गणेश जी ने कहा, “पहाड़ को देखकर रुकना मत। एक कदम आगे बढ़ाओ।”
युवक ने पहला कदम उठाया।
फिर दूसरा।
कई दिनों की मेहनत के बाद वह पहाड़ पार कर गया।
उसकी आँखों में खुशी थी।
उसे समझ आ गया कि गणेश जी ने उसकी बाधा हटाई नहीं थी—उन्होंने उसे बाधा पार करने की शक्ति दी थी।
शक्तिशाली संदेश:
ईश्वर हमेशा हमारी समस्याएँ समाप्त नहीं करते; कई बार वे हमें इतना मजबूत बना देते हैं कि समस्याएँ छोटी लगने लगती हैं।
(क्रमश:)
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