माइकल का साउथ् एडिशन-फनी स्टाइल
प्रस्तुति: शिखा तैलंग,भोपाल
यदि ‘माइकल’ फिल्म कोई साउथ इंडियन डायरेक्टर बनाता तो कैसी होती? चलिए, असली वाले माइकल को छोड़कर यह जानते हैं कि उसी से मिलती—जुलती फिल्म यदि युपरस्टार सूर्यान करता तो कैसी होती?
सिनेमा हॉल के बाहर लंबी लाइन लगी थी। पोस्टर पर लिखा था—
“सूर्यान — द अल्टीमेट मास एंटरटेनर”
नीचे छोटे अक्षरों में—
“एक आदमी… जो गुरुत्वाकर्षण से भी तेज़ भागता है!”
फिल्म शुरू होते ही स्क्रीन पर पहले दस मिनट तक सिर्फ हीरो के जूते दिखाए गए।
जूते धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे।
बैकग्राउंड में 786 ढोल, 95 नगाड़े और 42 किलो बारूद के साथ संगीत बज रहा था—
“टन्न्न्न्न… टडडडड… धूम… धाssssम!”
थिएटर में बैठे दर्शक समझ गए—
“हीरो अब आएगा।”
पास बैठा पप्पू बोला—
“भाई, अगर अब भी हीरो नहीं आया ना, तो इंटरवल हो जाएगा!”
तभी स्क्रीन पर धुआँ छाया…
एक हेलीकॉप्टर आया…
उसके ऊपर एक शेर बैठा था…
शेर के ऊपर बाइक…
और बाइक के ऊपर खड़ा था— सूर्यान!
पूरा थिएटर हिल गया।
सूर्यान ने एंट्री लेते ही ऐसा मुक्का मारा कि विलेन सीधे श्रीलंका जाकर गिरा।
वहाँ से फोन आया—
“भाई साहब, अपना आदमी यहाँ गिरा पड़ा है, ले जाइए!”
फिल्म में सूर्यान कोई साधारण इंसान नहीं था।
वो सुबह उठकर पहले 14 ट्रकों को पुशअप्स की तरह उठाता था।
फिर नारियल पानी पीकर टाइमपास करता था।
उसकी माँ भी सामान्य नहीं थी।
वो हर पाँच मिनट में कहती—
“सूर्यानsss… तू सिर्फ मेरा बेटा नहीं… तू बैकग्राउंड म्यूजिक का भगवान है!”
जैसे ही माँ बोलती—
पीछे से अचानक 200 वायलिन बजने लगते।
एक सीन में सूर्यान चाय पी रहा था।
तभी 50 गुंडे आ गए।
गुंडों का लीडर बोला—
“तू अकेला है सूर्यान!”
सूर्यान मुस्कुराया।
चश्मा हवा में उछाला।
चश्मा घूमता हुआ वापस आँखों पर आकर फिट हो गया।
फिर उसने धीरे से कहा—
“अकेला?
मेरे साथ कैमरा एंगल है!”
इसके बाद जो फाइट शुरू हुई…
उसमें कुर्सियाँ उड़ रही थीं…
टेबल उड़ रही थीं…
एक अंकल तो पॉपकॉर्न लेकर ही हवा में उड़ गए।
साउथ डायरेक्टर ने फिजिक्स को इतनी बुरी तरह हराया था कि न्यूटन की आत्मा भी थिएटर के बाहर धरना देने बैठ गई।
एक सीन में सूर्यान को गोली लगती है।
लेकिन गोली उसके सीने से टकराकर वापस गन में चली जाती है।
विलेन डरकर बोला—
“ये आदमी है या रिटर्न गिफ्ट?”
फिल्म का रोमांस भी कम महान नहीं था।
हीरोइन की एंट्री बारिश में हुई।
धीमी हवा चली।
उसके बाल उड़ने लगे।
फिर अचानक पीछे से 400 डांसर्स निकल आए, जिन्हें किसी ने बुलाया ही नहीं था।
सूर्यान हीरोइन को देखकर बोला—
“तुम्हारी आँखों में मुझे अपना भविष्य दिखता है।”
हीरोइन बोली—
“और मुझे तुम्हारे पीछे खड़े 400 डांसर!”
गाना शुरू हुआ—
हीरो चेन्नई में नाच रहा था…
अगले ही सेकंड स्विट्जरलैंड पहुँच गया…
फिर नारियल के पेड़ पर लटककर डांस करने लगा।
पप्पू फिर बोला—
“भाई, ये प्रेम कहानी है या पर्यटन विभाग का विज्ञापन?”
इंटरवल से पहले सबसे बड़ा ट्विस्ट आया।
पता चला कि सूर्यान का असली दुश्मन कोई गैंगस्टर नहीं…
बल्कि उसका गणित का टीचर था…
जिसने बचपन में उसे कहा था—
“तुम जिंदगी में कुछ नहीं करोगे!”
बस!
यहीं से सूर्यान ने कसम खा ली थी कि वो हर फिल्म में कम से कम 200 लोगों को हवा में उड़ाएगा।
क्लाइमैक्स में विलेन के पास 5000 जोगों की सेना थी।
टैंक… मिसाइल… हेलीकॉप्टर… सब मौजूद।
लेकिन सूर्यान अकेला था।
उसने जमीन से एक टूटी हुई चप्पल उठाई…
और उसी चप्पल से पूरी सेना हरा दी।
अंतिम फाइट इतनी स्लो मोशन में थी कि थिएटर में बैठे दो लोग शादी करके वापस आ गए, लेकिन फाइट खत्म नहीं हुई।
आखिर में विलेन हार गया।
मरते-मरते बोला—
“सूर्यान… तू इंसान नहीं है…”
सूर्यान मुस्कुराया।
हवा चली।
शर्ट के तीन बटन अपने आप खुल गए।
फिर उसने कहा—
“मैं साउथ इंडियन डायरेक्टर की कल्पना हूँ!”
पूरा थिएटर तालियों से गूँज उठा।
बाहर निकलते समय पप्पू बोला—
“फिल्म कैसी थी?”
दोस्त बोला—
“कहानी समझ नहीं आई…”
“फिर?”
“लेकिन मजा बहुत आया!”
और यही साउथ स्टाइल फिल्मों की सबसे बड़ी ताकत है।
वहाँ लॉजिक छुट्टी पर चला जाता है…
लेकिन एंटरटेनमेंट ओवरटाइम करता है!
(एआई जनरेटेड काल्पनिक रचना )
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