“कार्टून केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि बचपन की सबसे सुंदर और जीवंत स्मृतियाँ हैं।”
प्रस्तुति: शिखा तैलंग, भोपाल
विश्व के प्रसिद्ध कार्टून पात्र और उनकी विशेषताएँ
अस्सी और नब्बे के दशक में कार्टून पात्र बच्चों के आदर्श बन चुके थे। हर पात्र की अपनी अलग पहचान थी और हर कहानी में कोई न कोई सकारात्मक संदेश छिपा होता था।
सबसे पहले चर्चा करते हैं स्कूबी डू की।
यह डरपोक लेकिन प्यारा कुत्ता रहस्यमयी घटनाओं को सुलझाते हुए बच्चों को यह सिखाता था कि डर के बावजूद साहस नहीं छोड़ना चाहिए।
इसी प्रकार पोपाय द सेलर मैन ने बच्चों को पौष्टिक भोजन का महत्व समझाया। पालक खाते ही पोपाय की ताकत बढ़ जाती थी और बच्चे भी हरी सब्जियाँ खाने के लिए प्रेरित होते थे।
दुनिया भर में लोकप्रिय स्मर्फ्स ने मित्रता और सामूहिक सहयोग का संदेश दिया। छोटे-छोटे नीले पात्रों का संसार बच्चों को बहुत आकर्षित करता था।
उधर जेटसन्स ने भविष्य की दुनिया का अद्भुत चित्र प्रस्तुत किया। उड़ने वाली गाड़ियाँ, यांत्रिक सहायक और आधुनिक उपकरण देखकर बच्चे आश्चर्यचकित रह जाते थे।
नब्बे के दशक में पोकेमॉन ने विश्वभर में धूम मचा दी। पिकाचू जैसे पात्र बच्चों के प्रिय बन गए। यह कार्टून मेहनत, लक्ष्य और सच्ची मित्रता का संदेश देता था।
इसी समय टीनएज म्यूटेंट निंजा टर्टल्स भी बच्चों के बीच बहुत लोकप्रिय हुए। चारों कछुए मिलकर बुराई से लड़ते थे और बच्चों को एकता की शक्ति समझाते थे।
हास्य की दुनिया में लूनी ट्यून्स का स्थान भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। बग्स बनी और ट्वीटी जैसे पात्रों ने बच्चों को खूब हँसाया।
भारत में भी कई कार्टून पात्रों ने बच्चों के दिलों में विशेष स्थान बनाया। छोटा भीम ने भारतीय कार्टून जगत को नई पहचान दी। ढोलकपुर का यह साहसी बालक बच्चों को बहादुरी और सहायता की प्रेरणा देता था।
इसी प्रकार हनुमान पर आधारित कार्टूनों ने भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं को रोचक रूप में बच्चों तक पहुँचाया।
इन सभी कार्टून पात्रों ने यह सिद्ध किया कि मनोरंजन तभी सफल होता है जब उसमें हास्य, संवेदना और नैतिकता का सुंदर मेल हो।
क्रमश:
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