कार्टून केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि बचपन की सबसे सुंदर और जीवंत स्मृतियाँ हैं।”
प्रस्तुति: शिखा तैलंग, भोपाल
भारतीय कार्टून पात्र – अपनी मिट्टी की खुशबू से जुड़े नायक
विदेशी कार्टूनों के साथ-साथ भारतीय कार्टून पात्रों ने भी बच्चों के मन पर गहरा प्रभाव डाला। भारतीय पात्रों में अपनी संस्कृति, परिवार और नैतिक मूल्यों की झलक दिखाई देती थी।
सबसे लोकप्रिय पात्रों में मोगली का नाम प्रमुख है। जंगल में पशु-पक्षियों के बीच रहने वाला यह बालक बच्चों को प्रकृति से प्रेम करना सिखाता था।
इसके बाद भारतीय पौराणिक कथाओं पर आधारित कार्टूनों ने भी लोकप्रियता प्राप्त की। रामायण और महाभारत की एनिमेटेड प्रस्तुतियों ने बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई।
आधुनिक भारतीय कार्टूनों में छोटा भीम ने अपार लोकप्रियता हासिल की। लड्डू खाकर शक्तिशाली बनने वाला यह बालक बच्चों का प्रिय नायक बन गया।
इसी प्रकार लिटिल कृष्णा ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया।
भारतीय हास्य पात्रों में चाचा चौधरी का विशेष स्थान है। उनका तेज दिमाग बच्चों को बुद्धिमानी और सूझबूझ का महत्व समझाता था।
इसी प्रकार सुप्पंडी और शक्तिमान जैसे पात्रों ने भी बच्चों को अच्छाई और सच्चाई का संदेश दिया।
भारतीय कार्टूनों की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि वे केवल मनोरंजन नहीं करते थे, बल्कि बच्चों को अपनी संस्कृति से जोड़ते थे। यही कारण है कि आज भी लोग इन पात्रों को बड़े प्रेम से याद करते हैं।
कल्पनाशक्ति को मिली नई दिशा
कार्टून केवल हँसी-मजाक का माध्यम नहीं थे। उन्होंने बच्चों की कल्पनाशक्ति और वैज्ञानिक सोच को भी विकसित किया।
सबसे पहले चर्चा करते हैं डोरेमोन की।
यह भविष्य से आया यांत्रिक बिल्ली पात्र अपने अद्भुत उपकरणों के कारण बच्चों का प्रिय बन गया। समय मशीन और जादुई दरवाजे जैसी कल्पनाएँ बच्चों को विज्ञान की दुनिया की ओर आकर्षित करती थीं।
इसी प्रकार जेटसन्स ने भविष्य की तकनीक का ऐसा चित्र प्रस्तुत किया जिसे देखकर बच्चे आश्चर्यचकित रह जाते थे।
नब्बे के दशक में पोकेमॉन ने बच्चों में खोज और रणनीति की भावना को बढ़ावा दिया।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाले कैप्टन प्लैनेट ने बच्चों को प्रकृति की रक्षा के लिए प्रेरित किया।
भारत में तेनाली राम और अकबर-बीरबल
पर आधारित कार्टूनों ने तार्किक सोच और बुद्धिमत्ता को बढ़ावा दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छे कार्टून बच्चों में भाषा क्षमता, हास्यबोध और सामाजिक व्यवहार को बेहतर बनाते हैं। पुराने कार्टूनों में सकारात्मकता और सादगी अधिक थी, इसलिए वे बच्चों के मानसिक विकास के लिए लाभदायक माने जाते हैं।
क्रमश:
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