जहाँ एक शिक्षक का दिया गया उधार, ज़िंदगी भर का फ़र्ज़ बन गया।
उत्तम कुमार तिवारी ” उत्तम “, लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
…इस बात को कुलदीपक ने दिल से ले लिया ।
xxx
समय बीतता गया धीरे धीरे कुलदीपक् ने अपनी पढ़ाई पूरी करके नौकरी के लिये प्रतियोगित्मक परीक्षाएं देने लगा सौभाग्यवश उसका चयन प्रसासनिक सर्विस मे हो गया और वो SDM बना और उसकी नियुक्ति उसकी ही तहसील मे हुई । जब उसने अपना पदभार लेने के बाद अपने दलबल के साथ उसी प्राथमिक विद्यालय गया जहाँ उसने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई की थी ।
SDM की गाडी देख कर सभी लोग अचंभित हो गये कि कैसे साहेब अचानक आ गये ।
कुलदीपक अपनी गाडी से उतर कर सीधे प्रधानाचार्य के कक्ष मे गये और उनसे सरोज जी से मिलने की इच्छा ज़ाहिर की तब प्रधानाचार्य जी ने कुलदीपक से पूछा कि सरोज जी से मिलने का प्रयोजन क्या है तब कुलदीपक ने अपनी पुरानी सारी बात बताई और कहा कि मैम को वो सौ रुपये मुझे वापस करना है
तब प्रधानाचार्य जी ने कुलदीपक से बताया कि वो कई वर्ष पहले ही रिटायर हो गई है । तब कुलदीपक् ने उनके घर का पता पूछा तो प्रधानाचार्य जी ने सरोज जी के घर का पता दिया ।
xxx
कुलदीपक अपनी मैम के घर पहुँच गये और बेल को बजाया अंदर से एक लड़का निकला ।
उस लड़के से कुलदीप ने पूछा कि क्या सरोज मैम है घर पर उनसे मुझे मिलना है उस लड़के ने जवाब दिया कि वो घर पर नही है । तब कुलदीप कुछ निराश हुआ और उस लड़के से पूछा कि आप उनके कौन है तो लड़के ने जवाब दिया कि मै उनका बेटा हूँ । आप कौन है कृपया अपना परिचय दे
लड़के ने कुलदीपक से कहा तब कुलदीप ने जवाब दिया कि मै यहाँ का SDM हूँ तब लड़का कुछ घबड़ाया ।
कुलदीपक ने उनके लड़के से पूछा कि सरोज मैम कहा मिलेंगी मुझे उनको कुछ पैसा देना है तो लड़के ने कहा कि आप मुझे पैसे दे दे मै उनको पहुँचा दुूँगा लेकिन कुलदीप ने कहा कि नही मै खुद उनको पैसे दुूँगा कृपया आप बता दे कि वो कहाँ मिलेंगी तब लड़के ने कहा कि वो अब वृद्धा आश्रम मे रहती है ।
क्रमश: