“मोहब्बत, माँ-बाप और मजबूरियों के बीच फंसा एक अधूरा वजूद…”
आश हम्द, पटना (बिहार)
आदम ने फिर से आँखें मूंद ली। गुज़रे हुए लम्हें फिर से आँखों में तैरने लगे।
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लंदन के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में आज उसका पहला दिन था। सारी फॉर्मेलिटीज पूरी करके आदम मेडिकल के क्लास में आकर बैठ गया था। वो समय से पहले आ गया था, क्लासरूम खाली था। उसने अपनी बुक्स निकाली और पन्ने पलटने लगा। लेकिन एक भी शब्द उसे समझ में नहीं आ रहे थे। आदम सोचने लगा कि, क्या मेरे माँ-बाप को कभी भी मेरा, मेरे जज़्बातों का ख़्याल नहीं आता ! मेरी मर्ज़ी, मेरी ख़ुशी उनके लिए कोई मायने नहीं रखती ?
सोचते-सोचते उसे इतनी घबराहट होने लगी कि आदम बिना क्लास अटेंड किए ही यूनिवर्सिटी से बाहर निकल आया जनवरी का महीना था। रुक-रुक कर बर्फबारी मुसलसल हो रही थी। लंदन की बर्फीली सड़क पर बिना ओवरकोट के ही वो हॉस्टल की ओर पैदल ही चला जा रहा था। बर्फ के नन्हें नन्हें कतरे आदम के बालों में जज़्ब हो रहे थे। सर्दी हद से ज़्यादा थी लेकिन आदम को महसूस ही नहीं हो रही थी क्योंकि, मौसम का असर भी तभी होता है जब दिल का मौसम सदाबहार हो।
चलते-चलते वह थक गया तो पार्क के बेंच पर जाकर बैठ गया। बर्फ अभी भी गिर रही थी इसलिए पार्क में न के बराबर ही लोग थे। वह सर झुकाए चुपचाप बैठा था तभी किसी ने पुकारा। “ एक्सक्यूज मी सर, क्या मैं यहाँ बैठ सकती हूँ ?”
आदम ने बोला कुछ नहीं बस सिर हाँ में हिला दिया।
“ आप इतनी सर्दी में यहाँ क्या कर रहे हैं ? क्योंकि आज ठंड इतनी ज़्यादा है कि लोग अपने घरों में ही दुबके होंगे !”
“ हम्मम, यही सवाल मैं आपसे भी कर सकता हूँ आप इतनी ठंड में यहाँ….?” आदम की बात सुनकर वो लड़की हँस दी। उसकी हँसी इतनी ख़ूबसूरत खनकती हुई थी कि आदम नज़र उठाकर देखने लगा, और जब देखा तो देखता ही रह गया। उसकी हँसी ही नहीं वह ख़ुद भी बहुत ख़ूबसूरत थी।
“ आपने सही कहा, लेकिन यहाँ मेरी ड्यूटी लगी है, काम करती हूँ यहाँ तो मुझे तो आना ही था ।” उसने बताया।
“ आपका नाम जान सकता हूँ मिस ?” यूं तो आदम किसी से इतनी जल्दी फ्री नहीं होता था लेकिन आज इस लड़की का नाम पूछे बिना नहीं रह सका। “ मेरा नाम मैरी है ।”
“ आदम सुल्तान फ्रॉम इंडिया, आपसे मिलकर ख़ुशी हुई मिस मैरी !”
“ सेम हेयर आदम !” फिर तो रोज़ ही उनकी मुलाक़ातें होने लगीं।
मैरी के माँ-बाप काफी ग़रीब थे। मेहनत मज़दूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे थे। मैरी से छोटी उसकी दो और बहनें थीं, जिनकी पढ़ाई लिखाई की ज़िम्मेदारी मैरी ने अपने ऊपर ले ली थी। उसके लिए उसे जो भी काम मिलता, ख़ुशी-ख़ुशी कर लेती। पार्क में भी उसे सफ़ाई का काम मिला तो वह भी करने लगी क्योंकि, इसके उसे अच्छे पैसे मिल रहे थे। और अब तो उसे आदम भी मिल गया था। आदम और मैरी दोनों एक दूसरे को पाकर बहुत ख़ुश थे। आदम को उसकी ग़रीबी और सफ़ाई वाली होने से कोई फ़र्क नहीं पड़ता था। वह चाहता था कि, जल्द से जल्द मैरी को अपना ले। लेकिन उसके लिए मेडिकल कंप्लीट करना ज़रूरी था। वह जी-जान से जुट गया।
लेकिन हमेशा वह नहीं होता जो इंसान सोचता है। आदम के साथ भी वही हुआ जो कभी उसने सोचा भी नहीं था।
क्रमश: