ट्रेन यात्रा का एक सच्चा अनुभव, जो समझदारी और सतर्कता का आईना दिखाता है।
पंकज शर्मा “तरुण “, मंदसौर (मध्य प्रदेश)
जैसे ही मैं सपत्नीक रतलाम स्टेशन पर खड़ी डेमो ट्रेन में टिकिट लेकर सवार हुआ, ट्रेन में सवारी चढ़ने का सिलसिला अनवरत जारी रहा ।मेरे सामने वाली सीट पर दो नवयुवक बैठे थे, जो आपस में हँसी ठिठोली करने में मशगूल थे।मैं भी उनकी इस मस्ती पर मजे ले कर बैठा मुस्कुरा रहा था।
उन्होंने मुझसे आश्वस्त होकर खड़े होते हुए कहा कि अंकल क्या हम थोड़ी देर को प्लेटफार्म पर घूम कर आ सकते हैं? तब तक आप हमारी सीट पर कोई आकर न बैठे आप कृपया ध्यान रखें।मैंने अपनी सहमति दी तो वे नीचे उतर गए।नए~ नए मुसाफिर पुरुष महिलाएं आती ओर खाली सीट को देख कर मुझसे बैठने को पूछती तो मैं उनसे कहता कि जो लोग बैठे हैं वे नीचे उतर कर गए हैं।सीट खाली नहीं है।
कुछ ही पलों में वे दोनों युवक आ गए।उनके पीछे~ पीछे दो महिलाएं और एक नन्हा बालक भी आ गया। महिलाओं में एक बुजुर्ग महिला थी। उसने खाली सीट देखकर बैठने के लिए पूछा तो उसको उस युवक ने बैठने के लिए सहमति व्यक्त की तो जो बुजुर्ग महिला थी उसको बैठने के लिए आगे कर दिया और वह सामने की सीट पर बैठ गई।
सामने वाली सीट पर दो महिलाओं के पास एक बालक बैठा था उसको गोद में लेकर बैठने के लिए कह कर सीट खाली कर स्वयं को बैठने के लिए वह युवती कहने लगी।उस बालक की मां ने कहा कि मैं इसको अपनी गोद में लेकर नहीं बैठ सकती! यह सुन कर वह युवती तेश में आ कर बोली~ ऐसा तो ए सी वाली बोगी में भी नहीं होता है और तुम हो कि साधारण कुछ में ऐसा कर रही हो!इस तर्क का उस महिला पर कोई असर नहीं हुआ।तभी ट्रेन ने चलने हेतु हॉर्न बजा दिया और धीरे~ धीरे से ट्रेन रेंगने लगी।
ट्रेन चूंकि विपरीत दिशा में चली तो वह घबरा गई और साथ वाली बुजुर्ग महिला से बोली जल्दी से उतरो मम्मी।यह सुनते ही बोगी में बैठे सभी लोग उसकी इस मूर्खता पर हंसने लगे! वे दोनों उस बालक को ले कर चलती ट्रेन से उतरने लगी, ट्रेन चलने के विपरीत दिशा में उतरने से प्लेटफार्म पर असंतुलित हो कर गिरने लगी। कुछ पैदल यात्री जो प्लेटफार्म पर खड़े थे उन लोगों ने उनकी सहायता की तब वे गिरने से बची।
पढ़े लिखे शिक्षित लोग ट्रेन में चढ़ने से पहले आखिर अपनी ट्रेन के नंबर क्यों चेक कर नहीं बैठते?हम जिस ट्रेन की टिकिट बुक करते हैं उस ट्रेन के नंबर उस पर अंकित होते हैं, साथ ही जिस बोगी में आपको बैठना है, उस पर भी वही नंबर अंकित होते हैं। साथ ही प्लेट फॉर्म पर इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले चलते रहते हैं ,जिसमें प्रत्येक आने जाने वाली ट्रेनों से संबंधित सभी जानकारियां उल्लेखित होती है, स्टेशन पर माइक से उद्घोषणाएं भी होती हैं, जो यात्रियों को ट्रेनों से संबंधित सभी जानकारियां प्रसारित करते रहते हैं, कि कौन सी ट्रेन किस प्लेट फॉर्म पर आएगी या आ चुकी है, और कितने बजे स्टेशन से रवाना होगी।
इसके अलावा भी यदि आपके पास स्मार्ट फोन है, तो उस पर गूगल से ट्रेन नंबर डाल कर समस्त जानकारी प्राप्त कर सकते है।इन सबके अलावा आप अपने सह यात्री से भी पूछ कर यह तो पता लगा ही सकते हैं कि वे कहां जा रहे हैं उनके गंतव्य से ही यह अनुमान हो जाता है कि ट्रेन दिल्ली की ओर जाएगी या मुंबई की ओर!!
सतर्क हो कर समझदारी से यात्रा कीजिए।बनते कोशिश साधारण आरक्षित कोच में आरक्षण ले कर ही यात्रा की जाए तो सुरक्षित यात्रा की जा सकती है।
(सत्य घटना पर आधारित)
2 Comments
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सादर आभार आदरणीय,
मेरा निवेदन है कि इस संस्मरण को पढ़ें तथा दो जगह मंदसौर मध्य प्रदेश अनावश्यक टाइप हुआ है उसे कृपया डिलीट करिए। सादर।
पंकज शर्मा “तरुण “
अपेक्षित सुधार कर दिए गए हैं। ध्यानाकर्षण के लिए धन्यवाद!