( दिल बनाम दिमाग की जंग)
“जब भावनाएँ काबू से बाहर हों, तब प्यार ही एकमात्र इलाज होता है।”
प्रस्तुति: शिखा तैलंग, भोपाल
…”आपके चेहरे पर अजीब-सी बेचैनी है… कोई उलझन है?” रिया ने बड़े सीधेपन से पूछा।
“उलझन ही तो हूँ मैं,” युवान का जवाब भी उतना ही नग्न था। उस दिन के बाद, युवान और रिया की मुलाकातें बढ़ने लगीं।
रिया भावनाओं की गहराई को समझती थी, और युवान उन्हें नियंत्रित करने की वैज्ञानिक कोशिशें करता था। दोनों का दृष्टिकोण अलग था, लेकिन कहीं गहरे जाकर वो एक-दूसरे को पूरी तरह समझते थे।
रिया ने युवान को उसकी बीमारी के बारे में दोष नहीं दिया, बल्कि उसके अंदर छुपे बच्चे को देखा — जो दुनिया के डर से खुद को छुपा कर रखता था। वह कहती, “तुम्हारा दिमाग बस थोड़ा ज़्यादा महसूस करता है, इसका मतलब ये नहीं कि तुम कमज़ोर हो।”
युवान को अब लगने लगा था कि वह अकेला नहीं है। लेकिन भावनाओं की दुनिया में कदम रखते ही उसके भीतर फिर तूफान उठने लगे।
एक दिन पार्क में टहलते हुए, जब एक बच्चा गिर पड़ा और उसके घुटने से खून निकल आया, युवान का दिमाग अंधकार में चला गया। धड़कनें तेज़, सांसें अनियंत्रित, हाथ कांपते हुए — और फिर… वह वहीं बेहोश होकर गिर पड़ा।
डॉक्टरों ने चेताया, “अगर आपकी भावनाएं इस तरह से uncontrolled रहेंगी, तो यह हृदय या मस्तिष्क पर गंभीर प्रभाव डाल सकती हैं।” उस रात रिया ने उसे अस्पताल में देखकर उसका हाथ पकड़ते हुए कहा, “तुम्हें खुद को मारने की ज़रूरत नहीं है युवान… तुम लड़ सकते हो… और मैं तुम्हारे साथ हूँ।” यह वाक्य किसी दवा से कम नहीं था।
रिया ने युवान को थेरेपी करानी शुरू की। साथ में माइंडफुलनेस, ब्रेथिंग एक्सरसाइज़, और इमोशनल अवेयरनेस की टेक्निक्स सिखाईं। युवान का प्रतिरोध धीरे-धीरे पिघलने लगा। दोनों ने मिलकर एक रिसर्च मॉडल बनाया — “EmoSync” — एक ऐसा डिजिटल टूल जो हाइपर एमोशनल एपिसोड्स को ट्रैक करता और रियल टाइम में चेतावनी देकर व्यक्ति को स्थिर होने में मदद करता।
रिया का प्यार अब उसके लिए एक विज्ञान बन चुका था — ऐसा विज्ञान जिसमें कोई प्रयोग विफल नहीं होता था। एक शाम, जब रिया छत पर चाय लेकर बैठी थी और युवान उसके सामने बैठा था, वो बिना कुछ कहे उसे निहारता रहा। रिया ने मुस्कुराते हुए कहा, “क्या देख रहे हो?”
क्रमश: