प्रस्तुति : शिखा तैलंग, भोपाल
राकेश को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि ये बदलाव उनके पैरेन्टल ऐप्स का असर है या कोई गुप्त शक्तियों का चमत्कार।
उन्होंने अपनी पत्नी संगीता से कहा, “लगता है टेक्नोलॉजी ने कमाल कर दिया।” संगीता मुस्कुरा कर बोलीं, “या शायद बेटा अब बड़ा हो गया है और आप अब भी राउटर पकड़कर बैठे हैं।”
फिर एक दिन आरव आया, एकदम गंभीर मुद्रा में, और बोला, “पापा, आपसे कुछ ज़रूरी बात करनी है।”
राकेश का पहला ख्याल यही था—शायद वाई-फाई बंद हो गया। लेकिन नहीं, आरव ने कुछ ऐसा कहा जो किसी डाटा प्लान में नहीं आता। “पापा, मुझे पता है आप मेरी निगरानी करते हैं। कैमरा, ऐप्स, GPS सब। पहले बुरा लगता था, पर फिर समझ में आया कि निगरानी से बचने का सबसे आसान तरीका है—खुद पर निगरानी रखना। मैंने खुद को बदला है ताकि आप मुझसे मशीनों के ज़रिए नहीं, सीधे भरोसे के ज़रिए जुड़ें।”
राकेश एकदम शांत, थोड़े असहज, पर अंदर ही अंदर भावुक। कुछ पलों की चुप्पी के बाद उन्होंने मोबाइल उठाया, सारे ऐप्स डिलीट किए, कैमरा हटाया और बोले—”अब तुझ पर सिर्फ एक ट्रैकर रहेगा—मेरा विश्वास।”
उस दिन घर में न कोई मशीन बीप कर रही थी, न कोई कैमरा घूम रहा था। बस चाय की खुशबू थी, समोसे की प्लेट थी और आरव की मुस्कान थी—जो किसी उपलब्धि जैसी चमक रही थी।
मम्मी ने चाय और समोसे परोसे और आरव ने पहली बार बिना फोन देखे कहा, “थैंक यू मम्मी।” और पापा ने मुस्कुराते हुए कहा, “तू अब किसी मशीन से नहीं, अपने आत्म-नियंत्रण से चला रहा है खुद को। और बेटा, यही सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी है—जो ना डिसचार्ज होती है, न हैक।”
..अब राकेश को नए एप्लिकेशन की ज़रूरत नहीं थी, और आरव को कोई अलर्ट नहीं चाहिए था—दोनों के बीच अब एक मजबूत कनेक्शन था… जो वाई-फाई से नहीं, विश्वास से जुड़ा था।
लेकिन यह तो सिर्फ शुरुआत थी।
क्योंकि कहानी में एंट्री हो चुकी थी — ट्विंकल की!
ट्विंकल मल्होत्रा — एक अतरंगी, तेज़-तर्रार और TikTok-जन्मी लड़की, जो गूगल से भी तेज़ जवाब देती थी और इंस्टाग्राम के हर ट्रेंड में दिल से नाचती थी। वह आरव की क्लासमेट थी, और अब धीरे-धीरे उसके दिल की रिंगटोन भी बन चुकी थी।
ट्विंकल जब पहली बार आरव के घर आई, तो उसने एलेक्सा से पूछा,
“एलेक्सा, क्या तुम मुझसे जलती हो? क्योंकि आरव अब मुझसे बात करता है!”
क्रमश: