प्रस्तुति : शिखा तैलंग, भोपाल
ट्विंकल जब पहली बार आरव के घर आई, तो उसने एलेक्सा से पूछा,
“एलेक्सा, क्या तुम मुझसे जलती हो? क्योंकि आरव अब मुझसे बात करता है!”
एलेक्सा थोड़ी देर चुप रही (शायद शॉक में थी), फिर बोली, “सॉरी, मैं वो नहीं समझी।”
ट्विंकल ने घूरते हुए कहा, “समझेगी कैसे? तुम्हारे पास दिल थोड़ी है!”
राकेश उस समय पास ही थे और उन्होंने तुरंत फोन निकाला—कैमरा ऑन किया और बोले, “अब ये मोमेंट मुझे सेव करना पड़ेगा, ताकि सबूत रहे कि किसी ने एलेक्सा को भी पछाड़ दिया!”
ट्विंकल को देखकर घर में रौनक आ जाती थी। वह कभी रोबोट वैक्यूम के ऊपर बैठकर झूला झूलती, तो कभी स्मार्ट फ्रिज को उल्टा सीधा बोलती—”इतना स्मार्ट है, तो मेरी डायट को समझ क्यों नहीं पाता?”
एक दिन उसने राकेश से कहा,
“अंकल, अगर आप चाहें तो आपके पैरेन्टल कंट्रोल को मैं थोड़ा ‘प्यारेन्टल’ बना सकती हूं। मतलब, थोड़ा इमोशनल अपडेट दे दूं। हर ट्रैकिंग के बाद एक शायरी बोले —
‘तेरे मोबाइल के हर क्लिक्स पे नज़र रखता हूं,
बेटा मैं तुझसे बेइंतहा फिक्र करता हूं।’“
राकेश पहले चौंके, फिर हँस पड़े।
“तुम तो असली बगफिक्सिंग क्वीन निकलीं!”
आरव, जो पहले अपने पापा की नज़रों से बचता फिरता था, अब ट्विंकल की बातों से blush करता फिरता था। एक बार उसने ट्विंकल को डांटा, “तू हर जगह डायलॉग क्यों मारती है?”
ट्विंकल बोली, “क्योंकि मैं तेरे दिल की स्क्रिप्ट हूँ, और हर स्क्रिप्ट में थोड़ी कॉमेडी होती है, थोड़ी इमोशन।”
संगीता ने मुस्कुराते हुए कहा, “लगता है अब हमारे घर में दो एलेक्सा हो गई हैं—एक डिजिटल, एक दिल वाली। फर्क बस इतना है, एक सवाल सुनती है, दूसरी सीधे जवाब सुना देती है!”
अब आरव की ज़िंदगी में दो मजबूत कनेक्शन थे—एक पापा का विश्वास, दूसरा ट्विंकल का वाई-फाई फ्री प्यार।
और राकेश अग्रवाल, जो कभी कोडिंग से प्यार करते थे, अब मानने लगे थे कि कुछ चीज़ें मशीनें नहीं, दिल के नेटवर्क से कंट्रोल होती हैं।
(काल्पनिक रचना)
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