जादू की छड़ी नहीं, सकारात्मक सोच ही असली सुपरपावर है!
प्रस्तुति : शिखा तैलंग, भोपाल
…“आपके पास ताकत है, जादू है, डराने की क्षमता है। लेकिन खुशी है?”
बल्दूमोटू कुछ नहीं बोला।
“दोस्त हैं?”
चुप्पी।
“परिवार?”
और गहरी चुप्पी।
“सुबह उठकर कोई आपको कहता है—‘चाय पी लो’?”
बल्दूमोटू की आँखें नम हो गईं।
हरिया ने धीरे से पूछा—
“कभी किसी ने आपको प्यार से ‘पुत्तर’ कहा?”
बल्दूमोटू की नाक सुड़कने लगी।
“नहीं…”
हरिया ने उसके कंधे पर हाथ रखा।
“तो समस्या आपकी शक्तियों में नहीं है। समस्या आपकी सोच में है।”
झरिया ने धीरे से कहा—
“हरिया… तुम यह क्या कर रहे हो?”
हरिया बोला—
“काउंसलिंग।”
बल्दूमोटू ने अपनी छड़ी नीचे रख दी।
“क्या मैं भी सकारात्मक सोच सकता हूँ?”
हरिया मुस्कुराया।
“बिल्कुल। शुरुआत करो—‘मैं दुनिया जीतूँगा’ से नहीं…”
“तो?”
“‘मैं आज किसी को नुकसान नहीं पहुँचाऊँगा’ से।”
बल्दूमोटू ने सिर हिलाया।
“ठीक है।”
लेकिन असली ट्विस्ट अभी बाकी था
कुछ दिनों बाद हरिया को एक और चिट्ठी मिली।
इस बार चिट्ठी भारत से थी।
उसके पिता ने लिखा था—
“पुत्तर, वापस आ जा। मोहल्ले की पानी की टंकी ठीक करवानी है।”
हरिया ने तुरंत अपना सामान बाँधा।
झरिया ने पूछा—
“तुम वापस क्यों जा रहे हो? यहाँ तो तुम्हारा भविष्य है!”
हरिया बोला—
“भाई, भविष्य तो हर जगह है। लेकिन पानी की टंकी ठीक करवाने वाला कोई नहीं है।”
झरिया भावुक हो गया।
“क्या तुम मुझे भी अपने साथ ले जाओगे?”
हरिया बोला—
“बिल्कुल। लेकिन एक शर्त है।”
“क्या?”
“भारत में जादू की छड़ी से ज्यादा काम जुगाड़ से होता है।”
झरिया ने पूछा—
“जुगाड़ क्या होता है?”
हरिया ने मुस्कुराकर कहा—
“वही चीज़ जिससे टूटी बाल्टी, पुराना तार, एक रस्सी और पड़ोसी का स्क्रूड्राइवर मिलकर इंजीनियरिंग की डिग्री को शर्मिंदा कर देते हैं।”
भारत वापसी
भारत पहुँचते ही दोनों मोहल्ले में पहुँचे।
लोगों ने झरिया को देखा।
एक अंकल ने पूछा—
“बेटा, तुम कौन?”
(क्रमश:)
(AI GENERATED CREATION)
No Comment! Be the first one.