जादू की छड़ी नहीं, सकारात्मक सोच ही असली सुपरपावर है!
प्रस्तुति : शिखा तैलंग, भोपाल
…“बेटा, तुम कौन?”
झरिया बोला—
“झरिया ।”
अंकल ने कहा—
“कौन सा झरिया ? ऊपर वाले शर्मा जी के सामने वाला?”
हरिया बोला—
“नहीं अंकल, ये इंग्लैंड से आया है।”
अंकल ने झरिया को ऊपर से नीचे तक देखा।
“अच्छा! तो वहाँ भी बेरोजगारी है?”
झरिया रिया ने पहली बार महसूस किया कि असली कठिन परीक्षा तो अब शुरू हुई है।
पॉजिटिव सोच का अंतिम मंत्र
मोहल्ले की पानी की टंकी सचमुच खराब थी।
झरिया रिया ने निरीक्षण किया।
झरिया रिया ने अपनी जादू की छड़ी निकाली।
“मैं इसे ठीक कर सकता हूँ।”
हरिया ने उसका हाथ रोक दिया।
“नहीं।”
“क्यों?”
“क्योंकि यहाँ मामला जादू का नहीं, सोच का है।”
हरिया ने मोहल्ले के लोगों को इकट्ठा किया।
किसी ने पाइप लाया।
किसी ने औज़ार।
किसी ने सीढ़ी।
एक अंकल चाय ले आए।
और आधे घंटे की मेहनत के बाद टंकी ठीक हो गई।
पानी आने लगा।
पूरा मोहल्ला खुश हो गया।
झरिया ने आश्चर्य से पूछा—
“तुमने बिना जादू के यह कर दिया?”
हरिया ने कहा—
“हाँ।”
“कैसे?”
झरिया मुस्कुराया—
“जब लोग समस्या देखकर कहते हैं—‘ये नहीं हो सकता’, तब समस्या बड़ी हो जाती है।”
“और जब लोग कहते हैं—‘देखते हैं, कैसे हो सकता है’, तो रास्ता निकल आता है।”
झरिया ने सिर हिलाया।
“तो यही तुम्हारा असली जादू है?”
हरिया ने हँसते हुए कहा—
“नहीं भाई।”
“तो?”
“असली जादू है—मुश्किल समय में भी उम्मीद बचाए रखना।”
तभी हरिया की माँ ने आवाज़ लगाई—
“हरिया! अंदर आ, खाना ठंडा हो रहा है!”
हरिया दौड़ पड़ा।
झरिया पीछे-पीछे आया।
माँ ने पूछा—
“ये कौन है?”
हरिया बोला—
“मेरा दोस्त है। जादूगर है।”
माँ ने झरिया को देखा और कहा—
“अच्छा! जादूगर हो तो पहले ये प्याज़ काट दो।”
झरिया ने तुरंत अपनी छड़ी निकाली।
“अकियो प्याज़!”
कुछ नहीं हुआ।
हरिया हँसते-हँसते बोला—
“स्वागत है भारत में, भाई!”
और उस दिन से दुनिया ने दो महान जादूगरों की कहानी सुनी—
एक था झरिया , जो जादू की छड़ी से मुश्किलें हल करता था।
और दूसरा था हरिया, जो मुस्कुराकर कहता था—
“मुश्किल है? कोई बात नहीं। देखते हैं, इसमें भी कुछ अच्छा कैसे ढूँढ़ सकते हैं!”
क्योंकि जिंदगी में हर समस्या का समाधान जादू से नहीं होता।
कभी-कभी एक अच्छी सोच, थोड़ा साहस, कुछ मेहनत…
और ऊपर से माँ के दो गरम पराठे—
सबसे बड़ा जादू कर देते हैं!
अंतिम संदेश
सकारात्मक सोच का मतलब यह नहीं कि जिंदगी में समस्याएँ नहीं हैं। इसका मतलब है—समस्याओं के बावजूद यह विश्वास रखना कि कोई न कोई रास्ता जरूर निकलेगा।
और अगर रास्ता न मिले…
तो हरिया पुत्तर की तरह बोलिए—
“ओए, रास्ता नहीं है तो बना लेंगे!”
(AI GENERATED CREATION)
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