प्रस्तुति: शिखा तैलंग, भोपाल
“जिन्होंने सिखाया कि देशभक्ति का मतलब सिर्फ़ शब्द नहीं, कर्म है।”
सारांश :
फ़ील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ की कहानी साहस, रणनीति और नेतृत्व की मिसाल है।
1934 से 1971 तक, उन्होंने युद्ध के मैदान से लेकर प्रधानमंत्री के सामने तक अपने फैसलों से भारत की जीत तय की।
उनकी विरासत आज भी हर भारतीय सैनिक के दिल में जोश और आत्मविश्वास जगाती है। आइए उनकी जीवनी और योगदान के बारे में जानें विस्तार से—
अफ़सर – “यंग मैन, तुम शायद बचोगे नहीं… आख़िरी इच्छा?”
सैम (खून से भीगे, होंठों पर मुस्कान) – “एक सिगरेट… और भारत की जीत।”
उस वक्त शायद मौत भी हैरान थी – “ये आदमी डरता नहीं!”
कई हफ़्तों बाद, ऑपरेशन और इलाज के बाद, सैम फिर अपने पैरों पर खड़ा हुआ।
बर्फ़ीला मोर्चा – 1947 का कश्मीर
भारत आज़ाद हो चुका था।
लेकिन पाकिस्तान की तरफ़ से कबायली हमलावर कश्मीर में घुस आए थे।
सैम, तब एक लेफ़्टिनेंट कर्नल, श्रीनगर पहुँचे।
बर्फ़ के बीच खड़े सैनिक कांप रहे थे।
एक जवान बोला – “सर, हाथ-पैर सुन्न हो गए हैं… लगता है अब चल नहीं पाएँगे।”
सैम ने उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा –
सैम – “सिपाही ठंड से नहीं मरते, डर से मरते हैं। आज तुम्हें डरने की इजाज़त नहीं है।”
उनकी आवाज़ में ऐसा जोश था कि पूरी टुकड़ी ने अगले 48 घंटे में कई दुश्मन ठिकाने ढहा दिए।
1962 का कटु सबक
भारत-चीन युद्ध में सैम किसी अग्रिम मोर्चे पर नहीं थे, पर रिपोर्ट्स उनके पास आती थीं।
उन्होंने देखा – सैनिक बिना पर्याप्त ऊनी कपड़ों, हथियार और स्पष्ट आदेशों के ऊँचे मोर्चों पर भेजे जा रहे थे।
परिणाम – भारी नुकसान।
उस रात सैम ने अपने कमरे में अकेले बैठकर डायरी में लिखा –
“अगर कभी मैं सेनाध्यक्ष बना, तो एक भी जवान को बिना तैयारी मौत के मुँह में नहीं भेजूँगा।”
1965 का पंजाब मोर्चा
भारत-पाक युद्ध, सितंबर 1965।
सैम की कमांड में पंजाब सेक्टर में भारतीय सेना ने दुश्मन की कई चौकियाँ नष्ट कर दीं।
वो खुद जीप में आगे-आगे जाते, सैनिकों का हौसला बढ़ाते।
एक जवान ने कहा – “सर, आप क्यों आगे आ रहे हैं? ये तो ख़तरनाक है।”
सैम – “नेता वही है जो सबसे आगे चले। पीछे से आदेश देना कायरता है।”
1971: इंदिरा गांधी से टकराव
पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) में लाखों लोगों पर अत्याचार हो रहे थे।
शरणार्थी भारत आ रहे थे।
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सैम को बुलाया।
इंदिरा – “जनरल, हम कब युद्ध शुरू कर सकते हैं?”
सैम – “अभी नहीं, मैडम।”
इंदिरा (तेज़ स्वर में) – “क्यों? लोग मर रहे हैं, दुनिया देख रही है!”
क्रमश:
One Comment
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This Sam is much talked about in the recent days. The other Sam, Sam Pitroda is the one less talked about.