नववर्ष—उम्मीदों का उजास, आत्ममंथन की सौगात और मानवता का उत्सव।
सुशीला तिवारी, पश्चिम गांव, रायबरेली
आप सबको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ! इस विशिष्ट अवसर पर प्रस्तुत हैं ये कविताएँ जो बीते वर्ष के आत्ममंथन, अनुभवों और स्मृतियों को सहेजते हुए नववर्ष का आशावादी स्वागत करती हैं। मानवता, प्रेम, क्षमा, आत्मशुद्धि और सामाजिक समृद्धि की कामना इन रचनाओं का मूल भाव है। ये रचनाएँ नववर्ष को एक नैतिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक नवजागरण के रूप में प्रस्तुत करती हैं। आइए भरपूर पॉजिटिव एनर्जी के साथ इनका पूरा आनंद लें—
नये साल का स्वागत
क्या खोया क्या पाया , चलो आंकलन करते हैं ,
भूल पुराने लम्हों को अब नये साल में चलते हैं ।।
नये साल से है उम्मीद नयी कुछ तो नया करेंगे,
हर मुमकिन कोशिश कर, अब खुश रहा करेंगे ।
बीते साल की बीती बातें अब नही दोहराना है,
वक्त के साथ संभल कर आगे कदम बढ़ाना है ।
जाते हुए साल के संग ,कुछ सपने भी जाते है ,
पर जश्न मनाकर नये साल का हम मुस्काते हैं ।
कुछ गम देकर कुछ खुशी दे गया याद रह गई,
कुछ सपने पूरे थे कुछ ख्वाहिशें दबी रह गई ।
है अभिनन्दन नव वर्ष तुम्हारा शुभ हो आगमन ,
नये साल में समृद्ध समाज हो सुखी रहे हर मन।
आगत का स्वागत करें ,नव वर्ष का सुन्दर गान ,
शुभ हो नूतन वर्ष सभी का लो करते हैं आवाह्न ।
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बधाई दूँगा
नये साल पर गिन -गिन कर सबको बधाई दूँगा ।
कैद रहा जिन बंदिशो में मैं , उनको रिहाई दूँगा ।।
ये सच है कि टूट जायेंगे हम इन सबके बिना ,
पर ये इश्क , मुहब्बत , उल्फत को दुहाई दूँगा ।
वैसे तो बीते साल से मुहब्बत है यादे जुड़ी हैं ,
फिर भी मजबूरन दिल से, इसको विदाई दूँगा ।
तुम चाहकर भी मुझको भूल न पाओगे कभी ,
मैं वक्त के साथ आवाज बनकर सुनाई दूँगा ।
तुम नफ़रत करो उल्फत बस आज तलक ही ,
इसके बाद “सुशीला” नही तुमको दिखाई दूँगा ।
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अभिनन्दन नव वर्ष तुम्हारा
नया वेष, परिवेश नया, नयी प्रकृति का वंदन है ।
वंदन है, वंदन है, नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन है ।।
क्या क्या खोया क्या पाया ये सोंच व्यथित मन है ।
मानव मन में न द्वेष रहे मानवता प्रवेश करे
ज्ञान भक्ति की बहे अविरल धारा
अभिनंदन नव वर्ष तुम्हारा।
नूतन वर्ष के आने से प्रकृति खुशी से झूमे
सर्दी अपने यौवन पर और हवा की क्या कहने
सबके जीवन में खुशियाँ छाये मंगलमय जीवन हो
हर मन में उल्लास दिखे रहे प्रफुल्लित तन मन है ।
वंदन है वंदन है नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन है।
जो अवगुण मुझमें भरे पड़े
उनको प्रभु निष्कासित कर दो
मैं भटक न जाऊँ अंधियारे में
निज दया से मुझे प्रकाशित कर दो ।
नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन है।
One Comment
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बहुत सुन्दर प्रस्तुति 🙏