लेखक : पंकज शर्मा “तरुण “ (मंदसौर)
जब शब्द प्रेम, सोच और सच्चाई के रूप में उतरें — वो कविता शबनम की होती है।
सारांश :
“यकीं कर लो तनिक मेरा” (गीतिका) –सच्चे प्रेम की कोमल स्वीकारोक्ति है यह गीतिका, जिसमें प्रेमी अपनी गलतियों को स्वीकारते हुए वचन देता है कि वह हर हाल में अपनी प्रेमिका को सहेजेगा।
“निभाऊंगा तुम्हारा साथ” (मुक्तक) – एक प्रेमी की दृढ़ता और वचनबद्धता का भाव लिये यह मुक्तक भरोसे और रिश्ता निभाने की प्रेरणा देता है।
“जीवन जीने का विधान” (मुक्तक) – यह रचना सामाजिक समानता, स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार की वकालत करती है — हर व्यक्ति के लिए समान अवसर की माँग करती है।
“अफवाहों की आग” (ग़ज़ल) – यह ग़ज़ल अफवाहों, भ्रष्टाचार, दिखावटी धार्मिकता और मासूमियत के साथ अन्याय पर तीखा व्यंग्य करती है — समकालीन यथार्थ का प्रभावशाली चित्रण।
आइए प्रेम, जिम्मेदारी, सामाजिक चेतना और जीवन-दर्शन को संवेदनशीलता को व्यक्त करती इन कविताओं का आनंद लीजिए –
यकीं कर लो तनिक मेरा (गीतिका)
यकीं कर लो तनिक मेरा,बहुत मैं प्यार करता हूं।
अलावा और कोई है, नहीं स्वीकार करता हूं।।
रहे कोशिश यही मेरी, तुम्हारी ऊब को प्यारी।
कभी छाई उदासी तो,गुलो गुलजार करता हूं।।
गुलाबों सी महक जाओ,तुम्हारे लब खिले गुल हों।
चिरागों सा उजाला हो, तमस पर वार करता हूं।।
मिले जन्नत अगर उनको,धरा को मैं सजा दूंगा।
मुरारी आपको इस का,बहुत आभार करता हूं।।
हुई है गलतियां मुझसे,कई अवसर गंवाए हैं।
हुई जो भूल मुझसे तो,उसे स्वीकार करता हूं।।
_______________________________
निभाऊंगा तुम्हारा साथ (मुक्तक)
निभाऊंगा तुम्हारा साथ यह इकरार करता हूं।
कहीं तुम रूठ ना जाओ नहीं तकरार करता हूं।।
कसम खाता नहीं छोडूं तुम्हारे हाथ को जानू।
यकीं कर लो हमारा तुम,ह्रदय से प्यार करता हूं।।
_______________________________
जीवन जीने का विधान (मुक्तक)
जीवन जीने का भी कोई, विधान होना चाहिए।
सबको मिले अधिकार जब भी,समान होना चाहिए।।
ईश्वर ने हमें दिए तो हैं, मधुर सरस खाद्य पदार्थ।
सुख वैभव और स्वास्थ्य का,वरदान होना चाहिए।।
_______________________________
अफवाहों की आग (गजल)
अफवाहों की आग को कभी हवा मत देना।
बीमारों को नकली तुम कभी दवा मत देना।।
कोई जो करे मुसीबतों में मदद तुम्हारी।
अहसानों को उसके कभी भुला मत देना।।
भरा है जिनका पेट खा खा कर रिश्वतें।
भूल कर उन्हें प्रसाद कभी खिला मत देना।।
पत्थर है तो उसे पत्थर ही रहने दो।
सिंदूर लगा ईश्वर कभी बना मत देना।।
मासूम हैं जो बच्चे करते हैं नादानी।
इंसान हो तरुण तो कभी सजा मत देना।।