“कुछ मोहब्बतें मुकम्मल नहीं होतीं, फिर भी पूरी ज़िंदगी का सहारा बन जाती हैं।”
आश हम्द, पटना (बिहार)
“ एक्सक्यूज !”
एजाज ने पलट कर देखा तो देखता ही रह गया । वही लड़की उसके सामने खड़ी उसे पुकार रही थी ।
“ हैलो !..आप सुन क्यों नहीं रहे हो ? मुझे झील की सैर करनी है, करवाओगे ?”
नीतू ने हाथ लहराकर उसे होश की दुनिया में लाते हुए कहा ।
“ जी.. जी..मेम साब..चलिए आइए ।”
अपनी गैर-हाज़िर दिमाग़ पर ख़ुद को लानत मलामत करता हुआ शर्मिंदा होते हुए जल्दी से बोला ।
एजाज सिर झुकाए शिकारे की ओर बढ़ गया उस वक्त शाम होने को थी और नीतू मैम अकेली सैर के लिए आई थी इसलिए उसे थोड़ी असहजता महसूस हो रही थी । लेकिन, कहते हैं कि ग्राहक भगवान होते हैं तो भगवान को किसी बात के लिए मना कैसे कर सकते हैं । यही सोचकर वो शिकारे को वापस पानी में तैराने को तैयार हो गया ।
फिर रोज़ का मामूल बन गया । वो आती और सैर करके चली जाती । कभी किसी सहेली के साथ आती, कभी अकेली ही आ जाती जिस दिन वह अकेली आती उस दिन वो एजाज से बहुत बातें करती । एजाज बस हूँ, हाँ करता रहता या वह जो पूछती बस उसका जवाब देता । ख़ुद से कुछ कहने या पूछने की हिम्मत ही नहीं हुई कभी । उसको अपनी हैसियत का पता था इसलिए चाहने के बावजूद उसके क़दम आगे बढ़ने से इनकार कर देते ।
यह सिलसिला लगभग एक हफ़्ते तक चला । इसी दौरान नीतू मैम से बातों के दर्मियाँ पता चला कि – वह हैदराबाद के बहुत बड़े बिजनेसमैन रामप्रसाद की बेटी हैं और उन्हें घूमने फिरने का बहुत शौक है । वह अक्सर कहीं ना कहीं घूमने जाती रहती हैं । कश्मीर भी वो घूमने ही आई हुई थीं अपनी सहेलियों के साथ और होटल में ठहरी हुई थीं । उनका पूरा नाम नीता कुमारी था वो पढ़ाई पुरी करने के बाद अपना फैमिली बिज़नेस ज्वॉइन करने वाली थीं । इसलिए वो जहाँ जहाँ जाना चाहती थीं, वो पहले ही घूम लेना चाहती थीं । आज फिर नीतू मैम अकेली ही आई थीं । एजाज रोज़ की तरह उसका इंतज़ार कर रहा था । उसको आता देखकर उसकी ओर बढ़ा ।
“ नमस्ते एजाज, कैसे हो ?”
वो उसका नाम ऐसे ही बेतकल्लुफी से पुकारती थीं और एजाज को अपना नाम बहुत ख़ूबसूरत लगने लगता, एजाज मुस्लिम नौजवान था और नीतू हिन्दू लड़की । लेकिन एजाज को उससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता था उसे नीतू का नमस्ते कहना भी बहुत अच्छा लगता ।
“ बिल्कुल ठीक.. और आप ?”
उसने झिझकते हुए पूछा ।
“ तुम्हारे सामने हूँ..देख लो.. कैसे दिख रही हूँ ।”
नीतू ने बड़ी दिलफरेब मुस्कान बिखेरते हुए कहा ।
“ बहुत खूबसूरत..हमेशा की तरह ।”
एजाज ने भी तारीफ़ की तो वो झेंपकर मुस्कुराकर इधर देखने लगीं । चाँद की चाँदनी झील के पानियों पर छिटक कर एक अलग ही मंज़र पेश कर रहा था । रात के सन्नाटे में पानियों और उन दोनों की धड़कनों का शोर साफ़ सुना जा सकता था । इस जहां को भूलाए वह दोनों एक दूसरे की आँखों में ऐसे खोए थे कि – कितना वक्त बीत चुका था, उन्हें पता ही नहीं चला । चप्पू के रुकने के कारण झील में छोटी सी लहर उठने पर ही शिकारे ने हिचकोले खाए तो, एजाज जैसे नींद से जाग गया । उसने जल्दी से चप्पू चलाना शुरू कर दिया और शिकारे को किनारे की ओर ले जाने लगा ।
किनारे पर पहुँचकर जब उसने नीतू को शिकारे से उतार दिया तब एजाज की जान में जान आई । नीतू भी डर गई थी आज । उसे लगा था कि – वो पानी में गिर ही जाएगी आज और कोई आसपास था भी नहीं कि, उन्हें बचाने आता । फिर एजाज ने उनको उनके होटल तक पहुँचा दिया और घर लौट आया ।
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क्रमश: