“मोहब्बत, माँ-बाप और मजबूरियों के बीच फंसा एक अधूरा वजूद…”
आश हम्द, पटना (बिहार)
…आदम किसी छोटे बच्चों के जैसे फफक पड़ा।
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लेकिन मुनीर साहब ने हमेशा की तरह नज़रें झुकाकर जता दिए कि वही होगा जो तुम्हारी माँ चाहेगी। फिर सब कुछ वहाँ से छोड़-छाड़कर आदम को ज़बरदस्ती इंडिया लेकर आ गए। उसका जिस्म तो वापस आ गया था लेकिन उसका दिलों-दिमाग़ लंदन के उसी पार्क में क़ैद होकर रह गया था। आदम को फिर से ज़बरदस्ती ही इंजियरिंग करने के लिए दिल्ली भेज दिया गया। हॉस्टल में रहने की व्यवस्था भी कर दी गई पर उसका किसी चीज़ में दिल ही नहीं लगता।
उसकी ऐसी हालत देखकर उसके रूम मेट्स के लड़कों ने, और कुछ और लड़कों ने मिलकर एक पार्टी अरेंज करी किसी रेस्टोरेंट में, आदम को भी ले गए। लेकिन वहाँ जाकर आदम परेशान हो गया। सारे लड़के, लड़कियां सिगरेट, शराब पीकर म्यूजिक पर झूम रहे थे। आदम को वहाँ घुटन होने लगी।
आदम वहाँ से जाने लगा। “ आदम, कहाँ जा रहे हो ?”
“ मैं जा रहा हूँ यहाँ से !”
“ अरे यार ! सुनो तो, बहुत मज़ा आएगा रुको तो !”
“ नहीं, मैं यहाँ नहीं रुक सकता ।” आदम सोहेल का हाथ छुड़ाकर जाने लगा तो सोहेल ने उसे थाम लिया – “ अच्छा सुन, तू चाहता है ना कि तुझे नींद आए, तू भी आराम से सोए ?”
“ नहीं यार, मुझे कुछ नहीं चाहिए। ना नींद, न आराम जाने दो मुझे !” आदम ने झुंझलाते हुए कहा लेकिन सुहैल ने उसकी सुनी ही नहीं और एक बोतल उठाकर आदम के मुँह से लगा दिया। ना ना करते हुए भी दो-तीन घूंट उसके हलक से नीचे उतर ही गया। आदम के मुँह में कड़वाहट सी घुल गई।
उसने कोल्ड ड्रिंक की बोतल उठाकर मुँह से लगा लिया, लेकिन शराब की दो-तीन घूंट का सुरूर आदम पर सवार होने लगा था। और फिर उसे कुछ होश नहीं रहा सुबह जब उसकी आँख खुली तो वह अपने रूम में था और उसका सिर दर्द से फटा जा रहा था।
बगल वाले बेड पर सोते राहुल को जगाया – “ राहुल, उठो न !”
“ क्या हुआ यार सुबह-सुबह !”
“ अरे, मुझे कोई सर दर्द की दवाई दे दो, मेरा सर दर्द से फटा जा रहा है प्लीज़ कुछ करो !” आदम अपनी कनपटी दबाते हुए बोला।
“ रुक करता हूँ तेरा इलाज़ !” कहते हुए राहुल ने शराब की छोटी सी बोतल निकाली जिसे उसने कपड़ों में छुपा रखा था। “ ले, दो तीन घूंट गटक ले सारे दर्द दूर हो जाएंगे ।”
उस वक्त आदम इतना बेचैन था बिना सोचे समझे दो-तीन घूंट लेकर वापस जाकर बेड पर गिर गया।
क्रमश: