“जब AI सुर बिगाड़े, तब जागे श्रोता!”
प्रस्तुति: शिखा तैलंग, भोपाल
शहर के बीचोंबीच स्थित स्वर-सुधा सभागार में उस शाम कुछ अलग ही हलचल थी। दरअसल यह कोई आम संगीत कार्यक्रम नहीं था, बल्कि Music Lovers Association यानी MLA की आपात बैठक थी। बाहर बैनर टँगा था—“AI से परेशान संगीत प्रेमियों की जन-सुनवाई।” बैनर पढ़कर ऐसा लग रहा था मानो संगीत पर किसी अदृश्य तानाशाह ने कब्ज़ा कर लिया हो।
सभा शुरू होने से पहले ही लोग मोबाइल में उलझे हुए थे। कोई हेडफोन निकाल रहा था, कोई चिढ़कर स्क्रीन लॉक कर रहा था। मंच पर बैठे पंडित सुरसागर त्रिवेदी बार-बार अपना फोन देख रहे थे, जैसे वह उनसे कोई निजी दुश्मनी निभा रहा हो। आखिर उन्होंने माइक संभाला और गहरी साँस लेकर बोले, “भाइयो और बहनो, मैं बस एक सवाल पूछना चाहता हूँ—अगर मुझे राग भैरवी सुननी है, तो YouTube मुझे आधी रात का DJ रीमिक्स क्यों सुना रहा है?”
हॉल ठहाकों से गूँज उठा। सामने की पंक्ति में बैठी अनन्या वर्मा, जो क्लासिकल संगीत की जानी-मानी शिक्षिका थीं, हल्की मुस्कान के साथ खड़ी हुईं। रेशमी साड़ी में उनकी शालीनता देखते ही बनती थी। उन्होंने कहा, “कल मैंने अपनी छात्रा को मल्हार सिखाने के लिए एक वीडियो खोला। AI ने मान लिया कि मैं उदास हूँ और तुरंत मुझे ‘ब्रेकअप स्पेशल प्लेलिस्ट’ थमा दी।”
पीछे से आवाज़ आई, “मैडम, AI तो दिल का हाल ज़्यादा जानता है!”
यह आवाज़ थी रिया मल्होत्रा की—रेडियो जॉकी, चमकदार आँखें, स्टाइलिश ड्रेस और ज़ुबान पर बिजली। उन्होंने हँसते हुए कहा, “मैंने एक बार सिर्फ रिसर्च के लिए पंजाबी गाना सुना। अब AI रोज़ सुबह मुझे वही बीट्स सुना-सुना कर जगा देता है। लगता है मेरे अलार्म में भी DJ बैठा है।”
लोग हँसते-हँसते कुर्सियों पर झुक गए। तभी युवा सदस्य रोहन ने मोबाइल हवा में लहराया। “सर, देखिए। मैंने सर्च किया—‘लता मंगेशकर लाइव।’ AI ने नीचे लिखा—‘आपको यह भी पसंद आएगा: स्लो वर्ज़न, फास्ट वर्ज़न, बारिश वर्ज़न, रात वाला वर्ज़न और लूप में वही गाना, जब तक आप पागल न हो जाएँ।’”
सभा में बैठे बुज़ुर्ग सदस्य बोले, “पहले रेडियो तय करता था कि क्या बजेगा, अब AI तय करता है कि हम क्या पसंद करते हैं।”
तभी नैना कपूर उठीं। वह शास्त्रीय नृत्यांगना थीं, फिटनेस आइकन भी, और उनकी मौजूदगी में स्वाभाविक ग्लैमर था। उन्होंने गंभीर लेकिन व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “AI जानता है कि चमक बिकती है। इसलिए अच्छे संगीत के साथ ज़रूरत से ज़्यादा चमकदार थंबनेल चिपका देता है। लोग पहले चेहरा देखते हैं, फिर गाना… और कई बार गाना सुनते ही नहीं।”
कोई बोला, “मतलब संगीत अब बैकग्राउंड म्यूज़िक बन गया है!”
नैना मुस्कराईं, “और श्रोता स्क्रॉल करने वाली उँगली।”
अब तक पंडित सुरसागर का धैर्य जवाब दे चुका था। उन्होंने कहा, “AI ने हमें यह भ्रम दे दिया है कि वही हमारी पसंद जानता है। असल में वह सिर्फ हमारी आदतें गिनता है। आपने पाँच सेकंड सुना—वह मान लेता है कि आप उसी के भक्त हैं।”
तभी सभा में एक सधी हुई आवाज़ गूँजी। यह डॉ. मीरा सेन थीं—AI विशेषज्ञ, सादा पहनावा, लेकिन आँखों में स्पष्टता। उन्होंने कहा, “AI को दोष देना आसान है, लेकिन सच्चाई यह है कि AI वही परोसता है, जिसे हम बिना सोचे स्वीकार करते हैं। हम स्किप नहीं करते, डिसलाइक नहीं दबाते, और फिर शिकायत करते हैं।”
सभा थोड़ी शांत हुई। रिया ने चुटकी ली, “मतलब AI को भी रियाज़ की ज़रूरत है!”
डॉ. मीरा हँसीं, “बिल्कुल। और वह रियाज़ हम करा सकते हैं। अगर हम सजग होकर सुनें, अपनी प्लेलिस्ट खुद बनाएँ, अलग-अलग कलाकारों को सुनें, तो AI भी धीरे-धीरे सुधरता है।”
किसी ने पीछे से कहा, “यानि AI हमारा गुरु नहीं, शिष्य है!”
इस बात पर तालियाँ बज उठीं। MLA ने तय किया कि रोने-धोने से काम नहीं चलेगा। उन्होंने अभियान शुरू किया—सोचकर सुनो, चुनकर सुनो। लोगों से कहा गया कि अगर कुछ पसंद नहीं, तो चुप मत रहो। अगर कुछ अच्छा लगे, तो उसी तरह के विविध गीत खोजो। सिर्फ ट्रेंड के पीछे मत भागो।
कुछ महीनों बाद अजीब-सी खबर आई। YouTube पर एक नया फीचर आया—“My Mood, My Music।” अब AI पूछता था—क्या आप नया प्रयोग करना चाहते हैं या पुरानी यादों में जाना चाहते हैं?
MLA ने जश्न मनाया। अनन्या जी ने ठुमरी गाई, नैना ने भावपूर्ण नृत्य किया, रिया ने लाइव शो होस्ट किया और पंडित सुरसागर ने मुस्कराकर कहा, “जब श्रोता जागता है, तब मशीन भी सुर में आ जाती है।”
AI चुपचाप सीख रहा था।
और संगीत… वह फिर से आज़ाद हो गया था—कम से कम हमारे कानों में।
पंडित सुरसागर मुस्कराए—
“जब इंसान सजग हो जाए, तो मशीन भी सुर में आ जाती है।”
और सभागार में गूँज उठा—
संगीत ज़िंदा है, क्योंकि श्रोता ज़िंदा हैं।
(AI GENERATED CREATION)