“रामभावना से विश्वशांति तक — भारत की नई दिशा, मानवता का नया उजास।”
-श्यामकांत देशपांडे, नागपुर
…वहाँ महल, मूर्तियाँ, तालाब और राजसी संरचनाएँ आज भी विद्यमान हैं।
हिन्दू सेवा संघ की लगभग 80 देशों में शाखाएँ हैं, जहाँ लाखों रामभक्त सेवा कार्यों में निरत हैं।
विश्व राजनीति के बदलते स्वरूप में आतंकवाद का क्षय, प्रशांत क्षेत्र में चीन का घटता प्रभाव, भारत का तेज़ी से उभरता नेतृत्व, अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रगति और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वैश्विक लोकप्रियता ने विश्व को नए भारत की शक्ति से परिचित कराया है।
प्रधानमंत्री मोदी को मिला—
- अमरीका का चीफ़ कमाण्डर – लीज़न ऑफ मेरिट,
- संयुक्त राष्ट्र का चैम्पियन ऑफ अर्थ,
- रूस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ऑर्डर ऑफ सेंट एन्ड्रू द अपोस्टल
—इन सबने भारत की प्रतिष्ठा को नए शिखर पर पहुँचाया है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का यह कथन—
“प्रधानमंत्री मोदी अपने देश के हितों से कभी समझौता नहीं करते।”
—भारत की दृढ़ नीतियों का वैश्विक प्रमाण है।
भारत की बढ़ती सौर ऊर्जा क्षमता, डोकलाम में कुशल रणनीति, अफगानिस्तान वार्ताओं में भूमिका, और न्याय-आधारित नीति ने विश्व को भारत की दूरदर्शिता से परिचित कराया है।
संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना को भारत से हटाने, इज़राइल से प्रगाढ़ संबंधों और अरब देशों में ऐतिहासिक स्वागत ने सम्पूर्ण विश्व को चकित किया है।
भारत की नीति—गैर-आक्रामकता, शांतिपूर्ण सहअस्तित्व, बिना हस्तक्षेप समस्याओं का समाधान, रंगभेद का विरोध—ने भारत को विश्व का विश्वसनीय राष्ट्र बनाया है।
विश्वशांति की इस यात्रा में प्रधानमंत्री मोदी को—नाइजीरिया, फिलिस्तीन, मालदीव, मिस्र और सियोल जैसे देशों द्वारा प्रदत्त कालर और ग्रैण्ड कालर सम्मान—भारतीय प्रतिष्ठा का आधार स्तंभ बने हैं।
गेलप इंटरनेशनल ने उन्हें विश्व का तीसरा सबसे लोकप्रिय नेता घोषित किया है, जिनकी दृष्टि विश्वशांति और मानवता की समृद्धि पर केंद्रित है।
शांति का यही मार्ग भारत को विश्वगुरु बनाने की प्रथम सीढ़ी है—और भारत उस दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहा है।
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