प्रस्तुति : शिखा तैलंग, भोपाल
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जब शब्दों ने उम्मीद को जन्म दिया और प्यार ने हौसले को जीना सिखाया।
💫 सारांश:
यह प्रस्तुति मुझसे यानी एक साधारण भारतीय गृहिणी से संबंधित है। इसमें शिविका झरोखा डॉट कॉम के जन्म से पूर्व हुई पीड़ा और इसके उद्देश्य पर प्रकाश डाला गया है। ये पीड़ा पति की गंभीर बीमारी के रूप मेंं सामने आई और एक नई शुरुआत यानी इस वेबसाइट की स्थापना की प्रेरणा बनी।”शिविका झरोखा” अब सिर्फ एक वेबसाइट नहीं, बल्कि हजारों लोगों के लिए उम्मीद की खिड़की बन चुकी है। इस वेबसाइट की स्थापना के 25 माह पूरे होने के उपलक्ष्य में प्रस्तुत इस विशेष पेशकश को अवश्य पढ़िए—
मैं रो पड़ी, पर उन्होंने मेरा हाथ थामते हुए कहा—
“बीमारी शरीर की होती है, आत्मा की नहीं। अब तुम्हें और लिखना है, और जीना है—मेरे लिए भी, खुद के लिए भी।”
🌱 एक नई शुरुआत
उसी रात उन्होंने एक सुझाव दिया—
“एक वेबसाइट क्यों न शुरू करें? जिसमें ज़िंदगी की कहानियाँ हों, सकारात्मक सोच हो, सच्चाई हो, उम्मीद हो।”
मैंने झिझकते हुए पूछा—”क्या मैं कर पाऊँगी?”
उन्होंने मुस्कराते हुए कहा—“जब मैं साथ हूँ, तो डर किस बात का?”
बस, उसी शाम जन्म हुआ—ShivikaJharokha.com का।
🌼 नाम में जान
शिविका का अर्थ है पालकी और झरोखा का अर्थ है खिड़की। एक ऐसी खिड़की, जो ज़िंदगी की रोशनी, सच्चाई और संवेदना को दुनिया से जोड़ती है। इस वेबसाइट का मकसद अच्छे विचारों को फैलाना और सकारात्मक जीवन की झलक दिखाकर लोगों को अज्याधुनिक भारतीय लाइफस्टाइल के अनुरूप अपनी रोजमर्रा की परेशानियों से निपटने की राह दिखाना है।
हमारा सपना था—लोगों को बताना कि ज़िंदगी चाहे जितनी कठिन हो, उसकी खूबसूरती अब भी बाकी है।
📚 एक वेबसाइट, एक आंदोलन
इस वेबसाइट पर हमने लिखा—
• जीवन से जुड़ी सच्ची कहानियाँ
• सकारात्मक सोच और आत्मबल
• भारतीय रिश्तों, परंपराओं और समाज की झलक
• बीमारी से लड़ने की जिद, और उम्मीद
हर लेख एक दवा बन गया—दूसरों के लिए भी, खुद हमारे लिए भी।
💌 लोगों का साथ
धीरे-धीरे लोग जुड़ने लगे। भारत के कोने-कोने से, फिर विदेशों से—अमेरिका, खाड़ी देश, स्वीडन, बांग्लादेश तक।
हर कमेंट, हर मेल हमें यही कहता—”आपने मेरी सोच बदल दी।”
और हम समझ गए—ये सिर्फ एक वेबसाइट नहीं रही, ये अब लोगों की साँसों से जुड़ गई है।
💪 बीमारी से नहीं, हिम्मत से जीते
आज भी विनोद जी का इलाज चल रहा है। पर वो हर रोज़ मुझसे कहते हैं—
“तुम्हारे शब्दों में दवा है। लिखो, ताकि औरों को भी हिम्मत मिले।”
उनका दर्द भी अब एक प्रेरणा बन चुका है।
🌈 निष्कर्ष
“ShivikaJharokha.com” अब एक झरोखा बन चुका है—जहाँ से हज़ारों लोग अपनी ज़िंदगी की राह देखते हैं। हमने सीखा—
“जब अपने साथ हों, जब शब्दों में सच्चाई हो, और जब दिल में उम्मीद हो—तो कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती।
(सत्य घटनाओं वर आधारित)