प्रस्तुति : शिखा तैलंग, भोपाल
जब शब्दों ने उम्मीद को जन्म दिया और प्यार ने हौसले को जीना सिखाया।
💫 सारांश:
यह प्रस्तुति मुझसे यानी एक साधारण भारतीय गृहिणी से संबंधित है। इसमें शिविका झरोखा डॉट कॉम के जन्म से पूर्व हुई पीड़ा और इसके उद्देश्य पर प्रकाश डाला गया है। ये पीड़ा पति की गंभीर बीमारी के रूप मेंं सामने आई और एक नई शुरुआत यानी इस वेबसाइट की स्थापना की प्रेरणा बनी।”शिविका झरोखा” अब सिर्फ एक वेबसाइट नहीं, बल्कि हजारों लोगों के लिए उम्मीद की खिड़की बन चुकी है। इस वेबसाइट की स्थापना के 25 माह पूरे होने के उपलक्ष्य में प्रस्तुत इस विशेष पेशकश को अवश्य पढ़िए—
मैं एक आम भारतीय गृहिणी हूँ—वो जो हर सुबह चाय के प्याले से दिन शुरू करती है और रात को सबको सुलाकर अपने ख्वाबों से बातें करती है। पर उस आम दिनचर्या के भीतर एक खास कोना था… शब्दों से भरा, भावनाओं से सजा।
हाँ, मुझे लिखना पसंद था। कभी डायरी में, कभी मोबाइल में, और जब साहस हुआ तो इंटरनेट पर भी। मैंने “सुहासिनी” नाम से कहानियाँ लिखनी शुरू कीं, जो दिल से निकलीं और सीधे लोगों के दिलों तक पहुँचीं।
पाठकों के मेल, तारीफ़ें, आँसुओं और मुस्कानों से सजी प्रतिक्रियाएं—सब कुछ एक सपना सा लगने लगा। मगर ये सपना मेरे तक ही सीमित था।
🌀 एक मोड़
एक शाम मेरे पति विनोद जी, जो एक प्रसिद्ध प्रकाशन में काम करते हैं, मेरे लैपटॉप पर कुछ काम कर रहे थे। तभी उनकी निगाह मेरी एक कहानी पर पड़ी।
“ये तुमने लिखी है?” उन्होंने पूछा।
मैं घबरा गई। कहीं उन्हें बुरा न लगे। मगर उन्होंने जो कहा, उसने मुझे भीतर तक हिला दिया।
“तुम्हारी कलम में जादू है। तुम ये बंद मत करो।”
वो मेरा समर्थन नहीं, मेरा संबल बन गए।
🧪 परीक्षा की घड़ी
इसी दौरान, विनोद जी की तबियत बिगड़ने लगी। जांचों के बाद जो सामने आया, वो किसी वज्रपात से कम न था—Chronic Kidney Disease (CKD)।
मैं रो पड़ी, पर उन्होंने मेरा हाथ थामते हुए कहा—
“बीमारी शरीर की होती है, आत्मा की नहीं। अब तुम्हें और लिखना है, और जीना है—मेरे लिए भी, खुद के लिए भी।”
क्रमश:
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क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) : एक संक्षिप्त जानकारी
क्या है CKD?
क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) एक धीरे-धीरे बढ़ने वाली गुर्दों की बीमारी है, जिसमें किडनी की कार्यक्षमता समय के साथ कम होती जाती है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब किडनियाँ शरीर से विषैले पदार्थों और अतिरिक्त पानी को सही तरीके से बाहर नहीं निकाल पातीं।
रोगी को होने वाली समस्याएँ:
- थकान और कमजोरी
- चेहरे व पैरों में सूजन
- बार-बार पेशाब आना या पेशाब रुकना
- उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर)
- भूख में कमी और मतली
- साँस लेने में तकलीफ
- हड्डियों में दर्द और एनीमिया
इलाज के विकल्प:
- एलोपैथिक उपचार:
- दवाइयाँ — ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने, प्रोटीन यूरीन को घटाने और रक्त की गुणवत्ता बनाए रखने हेतु
- डायालिसिस — जब किडनी 85-90% तक खराब हो जाए
- किडनी ट्रांसप्लांट — अंतिम चरण में स्थायी समाधान
- होम्योपैथिक उपचार:
- प्रारंभिक अवस्था में कुछ रोगियों में लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद करता है
- यह धीरे कार्य करता है और लंबी अवधि के लिए उपयोगी हो सकता है
- आयुर्वेदिक उपाय:
- आयुर्वेद में पुनर्नवा, गोखरू, वरुणादि क्वाथ आदि जड़ी-बूटियाँ लाभकारी मानी जाती हैं
- पंचकर्म, योग और विशेष आहार से शरीर को शुद्ध और संतुलित रखा जा सकता है
आशा की किरण:
CKD एक गंभीर रोग है, परंतु संयमित जीवनशैली, उचित उपचार, संतुलित आहार और सकारात्मक सोच से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
“हर दिन, एक नई उम्मीद का दिन है – बस विश्वास बनाए रखें।”
2 Comments
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Touching!
An amazing story. I appreciate it.
Thanks for sharing.