लेखक : यशवंत कोठारी, जयपुर
फ्रैक्चर से ज़्यादा दर्दनाक है अस्पताल का बिल – हँसते हँसते सोचने पर मजबूर करने वाली व्यंग्य कथा।
सारांश :
यह व्यंग्यात्मक कहानी एक मामूली फ्रैक्चर, अस्पताल की लूट और डॉक्टरों के धंधे पर गहरा कटाक्ष करती है। बढ़ते हॉस्पिटल बिल, बेमतलब के टेस्ट और मेडिकल इंडस्ट्री की सच्चाई को हास्य के अंदाज़ में पेश किया गया है। अंत में लेखक एक स्थानीय हड्डी पहलवान से इलाज कराकर बच निकलता है।
आइए पढ़िए मेडिकल माफिया और हेल्थकेयर सिस्टम पर आधारित इस हास्य व्यंग्य को विस्तार से –
चैप्टर-1
आखिर मेरे को भी फ्रेक्चर का लाभ मिल गया.जिस उम्र में लेखकों को मधुमेह ,उच्च रक्त चाप ,किडनी फेलियर ,या स्ट्रोक या ह्रदय की बीमारी मिलती है मुझे फ्रेक्चर मिला.
मैंने सोचा अब इसी से काम चलाना होगा.मैंने प्रभु का धन्यवाद किया,और इस दर्दनाक हादसे पर यह स्वभोगी-स्ववित्तपोषित आलेख पेश-ए-खिदमत है.
हुआ यों कि मैं सायंकालीन आवारा गर्दी के लिए निकला.गली पर ही एक एक्टिवा पर तीन बच्चियां तेज़ी से निकली ,मैं साइड में था ,मगर शायद दिन ख़राब था ,एक कुत्ते को बचाने के चक्कर में मेरी पीठ पर दुपहिया वाहन ने तीनों लल्लियों के साथ टक्कर मारी,मैं गिरा ,
सड़क पर तमाशा होने ही वाला था कि लड़कियों ने वाहन उठाया और चलती बनी .तभी मुझे किसी भले मानस ने उठाया मेरे हाथ में असहनीय दर्द शुरू हुआ, मुझे समझ आ गया कही कुछ गड़बड़ है.घर वाले आये तब तक में पास के क्लिनिक में चला गया. डाक्टर समझदार था बोला-
बाबा अकेले आये हो ?कुछ जेब में है या नहीं?
मैंने कहा –अभी तो मरहमपट्टी कर दो.तब तक घरवाले आ जायेंगे.
बाबा यह तो दुर्घटना का मामला है,पुलिस का लफडा भी हो सकता है.मैंने शालीनता से कहा –पुलिस केस नहीं करना है.
मैं दर्द से कराहता रहा,डाक्टर के कुछ फर्क नहीं पड़ा.घ रवाले भी आ गये.
अब डाक्टर ने ध्यान दिया ,एक्स रे होगा ,कुछ और जांचे होगी .दस हज़ार जमा करा दो ,फिर देखते हैं और पुलिस केस नहीं करना है इस का भी फार्म भर दो.घरवाले कागजी कार्यवाही में लग गए ,मैं पड़ा पड़ा कराहता रहा .
नर्स ने चुपचाप पड़े रहने के निर्देश जारी किये.दर्द बढ़ता रहा एक्स से पता चल गया हाथ की हड्डी टूट गयी है.हाथ में सूजन आ गई .दर्द बढ़ गया लेकिन अभी कोई दवा- दारू नहीं हुई थी .
डाक्टर ने मुझे अन्दर बुलाया और कहा –बाबा तुम्हारी हड्डी में फ्रेक्चर है .अपने पुराने ज्ञान के आधार पर मैंने पूछ लिया –रेडियस टूटी है या अलना . डाक्टर आग बबूला हो गया बोला –डाक्टर मैं हूँ या तुम ? तुम्हारी टिबिया फेबुला लेफ्ट साइड की टूटी है.
घरवालों ने बताया की दर्द तो दायें भाग में हाथ में हैं लेकिन डाक्टर नहीं माना बाद में पता चला की एक्स रे प्लेट गलती से बदल गयी थी.एक पांव के मरीज़ की प्लेट मेरी समझ ली गयी थी.
अब पता चला की दाहिने हाथ की रेडियस में हेयर –थ्रेड फ्रेक्चर है ,जो मामूली क्रेप बेंडेज से ठीक हो सकता था.मैं समझ गया ये सब व्यंग्य लिखने के बाद मिली बाद दुआओं का असर है.
मगर डाक्टर को धंधा चलाना था. उसने अपनी नर्स को बुलाया मेरे को हाथ लटकाने के लिये सपोर्ट ,बेंडेज,दवा पेन किलर,व् कई अन्य साजो सामान देने का आदेश दिया.मुझे डाक्टर किराने का दुकानदार लगा.
बिल बना मात्र पन्द्रह हज़ार जिसमे मेरे वहां लेटे रहने का भी खर्च शमिल था.घरवाली ने सब को खबर कर दी बच्चे भागे भागे आये.
क्रमशः
(काल्पनिक रचना )
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