“पंजाब की विनाशकारी बाढ़ के बीच आशा, साहस और एकता का संदेश“
तेज बीर सिंह सधर, दसुया (पंजाब)
सारांश:
पंजाब की विनाशकारी बाढ़ के बीच गुरु नानक देव जी की तीन शिक्षाएं — नाम जपो, किरत करो और वंड छको — आज भी लोगों को आशा, साहस और एकता का संदेश दे रही हैं। पानी के इस तांडव में पंजाब के लोगों ने अपने कर्म, सेवा और भाईचारे से एक मिसाल कायम की है। यह केवल राहत कार्य नहीं, बल्कि गुरु नानक के मार्ग पर चलती सच्ची पंजाबियत की जीवित तस्वीर है। आइए, इस महाआपदा और राहत कार्यों के बारे में अब जानें विस्तार से—
आज इस दुःख की घड़ी में गुरु नानक देव जी की तीन शिक्षाओं के बारे में बात करते हैं जो आज भी लोगों को मजबूती देने के लिए खड़ी हैं देती हैं. ये तीन सीखें कर्म से जुड़ी हुई हैं -नाम जपो, किरत करो और वंड छको – यानि ईश्वर की वंदना करो, मेहनत करो और बाँट कर खाओ. पंजाब की बाढ़ विपदा के इन हालात में यह तीनों शिक्षाएं पंजाब को मजबूती देती हैं. इस राह पर चलते हुए गुरु नानक ने खुद भी रावी पार करतार पुर में लगभग दो दशक खेती में बिताये थे. उसके पहले ही उन्होनें जो बीस रूपये का लंगर शुरू किया था वह आज भी विश्व में जगह जगह चलता रहता है.
बाढ़ की इस विभीषिका में जो तांडव आज तीनों नदियों रावी, सतलज और ब्यास ने मचाया है उसमें पंजाब के लोगों ने अपना धैर्य नहीं खोया है. पानी के बहाव को रोकने के लिए उस परमात्मा के नाम के साथ यहाँ के बच्चों, बूढों और स्त्री पुरुषों ने इकट्ठे हो कर इस विपत्ति में एक मिसाल कायम की है. जरूरत के लिए इस तरह की एक जुटता कहीं और नहीं दिखाई देती जो पंजाब में दिखती है. यह पंजाबियत की सांसों में जो बसी है.
1988 के बाद नदियों का जो तांडव आज पंजाब पर फिर हावी हुआ है उसमें पंजाबियों को नावों तक के निर्माण करने का गुण दे दिया है. अपनी मेहनत से, सामने पड़े भारी नुक्सान की परवाह न करते हुए एक दूसरे और मवेशियों यहाँ तक की कुत्तों तक को भूख से बचाने की कोशिश की जा रही है. पंजाब की विभिन्न धार्मिक संस्थाएं चाहे वह किसी धर्म से हों सभी दिल खोल कर लंगर और जीने की अन्य सुविधाओं को मुहैया करने के लिए साथ खड़ी हैं. कई स्थानों पर तो खाने पीने की वस्तुओं का इतना भण्डार इकठ्ठा हो गया ही कि इसके लिए मना करना पड़ रहा है. जो पानी की बीस रूपये की बोतल कई जगह विपत्ति में सौ रूपये तक मिलती है उसके ढेर लगा दिए गए हैं ताकि पानी की बाढ़ में भी कोई प्यासा न मरे.
गुरु नानक की इस धरती पर आज केवल अरदास, प्रार्थना और दुआ करने की जरूरत है, बाकी, काम में पंजाबी रात दिन लगे हुए हैं.
इसी को कहते हैं पंजाबियत ! बस अरदास करें कि नदियाँ वापस हो लें. वैसे अभी इससे भी बड़ी चुनौतियाँ बाढ़ ख़त्म होने के बाद की हैं जिनसे निपटने की तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं.
आईये हाथ में हाथ लेकर सभी बाढ़ के इस विकराल रूप में पीड़ितों का साथ दें.
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Kal hi yha gurunanak jayanti manayi thi humne
Dhan Guru Nanak !