जादू की छड़ी नहीं, सकारात्मक सोच ही असली सुपरपावर है!
प्रस्तुति : शिखा तैलंग, भोपाल
शहर के एक छोटे-से मोहल्ले में हरिया नाम का लड़का रहता था। पूरा नाम था—हरियामल सिंह, लेकिन मोहल्ले में प्यार से सब उसे “हरिया पुत्तर” कहते थे।
हरिया की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह हर परिस्थिति में सकारात्मक सोचता था।
मोहल्ले की बिजली चली जाए—
“कोई बात नहीं जी, मोमबत्ती की रोशनी में चेहरे और भी अच्छे लगते हैं!”
बारिश में छत टपकने लगे—
“वाह! घर में ही मानसून का मज़ा!”
परीक्षा में 33 नंबर आए—
“देखो! पास होने के इतने करीब हूँ। अगली बार 34 ले आऊँगा!”
एक दिन उसके दोस्त ने पूछा,
“हरिया, तू इतना पॉजिटिव कैसे रहता है?”
हरिया ने गंभीरता से कहा,
“क्योंकि निगेटिव सोचने से बिजली का बिल कम नहीं होता!”
दोस्त ने सिर पकड़ लिया।
लेकिन हरिया का असली मुकाबला उस दिन शुरू हुआ, जब उसे अचानक एक रहस्यमय चिट्ठी मिली।
चिट्ठी पर लिखा था—
“प्रिय हरियामल,
तुम्हें जादू सीखने के लिए आमंत्रित किया जाता है।”
हरिया की आँखें चमक उठीं।
“ओए होए! लगता है आखिरकार मेरी प्रतिभा पहचान ली गई!”
नीचे पता था—
हॉगवर्ट्स स्कूल ऑफ विचक्राफ्ट एंड विजार्ड्री।
हरिया ने चिट्ठी अपनी माँ को दिखाई।
माँ ने चश्मा ठीक करते हुए पूछा,
“ये क्या है?”
“माँ, मुझे जादू सीखने बुलाया है!”
माँ बोलीं,
“पहले कमरे की सफाई का जादू सीख। तीन महीने से कपड़े कुर्सी पर पड़े हैं।”
हरिया बोला,
“माँ, वो कपड़े नहीं हैं। वो मेरी कलात्मक स्थापना है।”
माँ ने तुरंत झाड़ू उठाई।
हरिया समझ गया कि आज असली जादू होने वाला है।
हॉगवर्ट्स में हरिया का प्रवेश
कुछ दिनों बाद हरिया हॉगवर्ट्स पहुँच गया।
वहाँ उसकी मुलाकात हुई प्रसिद्ध जादूगर झरिया से।
झरिया ने चश्मा ठीक किया और पूछा,
“तुम कौन हो?”
हरिया ने हाथ मिलाते हुए कहा,
“हरिया पुत्तर। इंडिया से।”
झरिया ने पूछा,
“तुम्हारे पास जादुई शक्तियाँ हैं?”
हरिया मुस्कुराया।
“बिल्कुल।”
“क्या कर सकते हो?”
“मुश्किल परिस्थिति में भी उम्मीद ढूँढ़ सकता हूँ।”
झरिया थोड़ा उलझ गया।
“मेरा मतलब है—तुम छड़ी से क्या कर सकते हो?”
(क्रमश:)
(AI GENERATED CREATION)