“सोशल मीडिया की मोहब्बत हमेशा वैसी नहीं होती जैसी दिखती है!”
विजय कुमार तैलंग, जयपुर
सारांश:
एक युवक अपने सपनों की लड़की से मिलने जा रहा है, लेकिन सामने बैठी अधेड़ महिला उसे उलझनों के जाल में फंसा देती है। क्या सचमुच वह महिला भविष्य देख सकती है? या फिर यह सब उसकी प्रेमिका कृतिका का बड़ा खेल है? सच सामने आते ही उसकी दुनिया हिल जाती है। ऐसा क्यों और कैसे हुआ?आइए, जानें विस्तार से—
…तभी एक अधेड़ महिला जिसकी उम्र अट्ठावन या साठ वर्ष की होगी, उसके सामने आई और मुस्कुराई। वह समझा नहीं तो महिला बोली – “क्या मैं यहाँ बैठ सकती हूँ? “
“आंटी, इस सीट पर कोई आने वाला है। “
“नहीं आयेगा कोई।” महिला ने मुस्कुराते हुए आत्मविश्वास से कहा।
जवाब सुनकर वह आश्चर्यचकित रह गया। बोला, “आप ये कैसे कह सकती हैं? “
“मुझे ज्योतिष का ज्ञान है। क्या मैं बैठ जाऊँ? “
“बैठिये, लेकिन वो आ गया तो आपको सीट खाली करनी पड़ेगी।” वह बोला।
“चिंता मत करो! ” कहकर वो अधेड़ महिला सीट पर आ जमी। वह अधेड़ महिला से नजरें चुराता हुआ कभी घडी तो कभी हाल की शोभा को निहार रहा था। उसकी बेचैनी पल पल में बढ़ रही थी।
“जिसका तुम इंतजार कर रहे हो, उसका नाम का पहला अक्षर ” क” से है और वो सुंदर नवयौवना है?” अधेड़ महिला ने पूछा।
“आप…? “
“मैं ज्योतिष जानती हूँ न इसलिए!” अधेड़ महिला मुस्कुराते हुए बोली।
उसने महिला की बात अनसुनी करके कृतिका को अपने मोबाइल से फोन लगाया किंतु उसका फोन स्विच ऑफ आ रहा था।
“कुछ खिलाओगे पिलाओगे नहीं?” अधेड़ महिला उससे मुस्कुराते हुए बोली।
वह खीज से भर गया था, बोला, “क्या मैंने आपको इन्वाईट किया था? “
“क्या पता?” वो अधेड़ महिला फिर ढीठता से मुस्कुराई।
“लगता है आप मुझे यहाँ से उठा के ही मानेंगी!”
“अरे नहीं नहीं। मैं ही चली जाती हूँ। असुविधा के लिए खेद है। ” कहकर वो महिला उठकर जाने लगी तो वह बोला, “आप कैसे आईं और बिना कुछ ऑर्डर किये कैसे चल दी, मुझे समझ में नहीं आया? ”
“ओह, कुछ बातें न ही समझी जाएं तो बेहतर होगा! हाँ, मेरे जाने के बाद उसका फोन मिल जायेगा।” वह खड़ी होती हुई बोली।
“आपको कैसे पता?”
“क्योंकि मैं ज्योतिष जानती हूँ।” कहकर वह अधेड़ महिला मुस्कुराती हुई चल दी।
वह उसे जाते हुए देख रहा था। जब वह होटल के गेट से निकलने लगी तो उस ने उसे फ्लाइंग किस छोड़ा तो वह हक्का बक्का हो गया।
उसने आखिरी बार कृतिका को फोन मिलाया। इस बार घंटी बज उठी।
“हैलो! ” कृतिका का सुरीला स्वर उसके कानों में गूंजा। वह चूंकि खीज से भरा हुआ था तो बोल पड़ा, “कृतिका ये क्या मजाक है? मैं एक घंटे से तुम्हारा वेट कर रहा था और तुमने फोन भी स्विच ऑफ कर लिया। आना है या नहीं?”
इस पर कृतिका का जवाब आया -“मैं तो आई थी लेकिन तुमने सीधे मुँह बात ही नहीं की। मैंने कुछ खिलाने को भी कहा लेकिन तुमने कहा कि क्या मैंने तुम्हे इन्वाइट किया है? “
“क्या बकवास कर रही हो? वो तो मैंने एक आंटी को कहा था जो मेरे सामने आकर जम गई थी! “
“वही तो थी मैं! ” कृतिका हँसती हुई बोली।
“क्या…??? ” वह चौंक गया और उसकी आँखें भर आईं। “इतना बड़ा धोख़ा?” वह फोन पर ही बोला!
“धोख़ा नहीं, सबक! ” कृतिका बोलती गई – ” तुम मर्द लोग ये समझते हो कि तुम्ही मजाक कर सकते हो? धोख़ा दे सकते हो? मैं जब चौबीस साल की थी तो एक अंकल ने मुझे अपने प्रेमजाल में इसी तरह फंसाया था। मैं उसे अपनी ही उम्र का समझकर उससे चैटिंग करती रही क्योंकि उसने अपनी उम्र और फोटो शायद अपनी जवानी के फेस बुक की वाल पर लगाए हुए थे। बाद में जब वो सामने आया तो पता चला वो मेरे बाप की उमर का था। मैंने उसे खूब सुनाया और तब मैंने प्रण ले लिया कि जब मैं बूढ़ी हो जाऊंगी तो किसी हैडसम युवक से इसी तरह बदला लूँगी।”
“लेकिन तुमने किसी और की गलती की सजा मुझे क्यों दी?” उसने भर्राये गले से कृतिका से पूछा।
कृतिका हँस दी और उसने फोन बंद कर दिया। अब उसमें पुन: फोन मिलाने की हिम्मत न रह गई थी।
“साब, आपका ऑर्डर?” अचानक वेटर ने आकर पूछा तो वह उठते हुए बोला -“अगले जनम में!” इतना कहकर वह तेजी से होटल के बाहर निकल गया।
(काल्पनिक रचना)
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