लेखक : राजेन्द्र कुमार पाण्डेय “राज” (बिलासपुर)
जहां हर एहसास ग़ज़ल बन जाए, वही होती है सच्ची मोहब्बत की पनाह।
सारांश :
यह कविता एक सच्ची मोहब्बत की शरण में पनपते भावों को दर्शाती है, जहाँ हर एहसास, हर आहट एक ग़ज़ल बन जाती है। प्रेमिका की आँखों, बातों, इशारों और दूरियों में भी शायर को ग़ज़ल का सौंदर्य नजर आता है। यह रचना प्रेम की गहराई, आत्मिक जुड़ाव और यादों की मूक गहराई को बेहद कोमलता से बयां करती है।
आइए एक अत्यंत भावुक और सौंदर्य से भरपूर ग़ज़ल-शैली की प्रेम कविता का आनंद लीजिए –
मोहब्बत की पनाह…
मोहब्बत की पनाहों में गजल होती है
प्यार से किये वादों में गजल होती है
उनसे मुलाकात हुई बस सुकून के लिए
उनकी हसरत भरी आहों में गजल होती है
उनका चेहरा खुदा जैसा अक्स दिखता है
उनकी फैली हुई बाहों में गजल होती है
मलिका-ए-हुश्न की हुकूमत है दिल पर
हमारी हर एक साँसों में गजल होती है
जिन्दगी की हर इम्तेहां बेहतरी के वास्ते
उनकी हर नेक इशारों में गजल होती है
हम निकल पड़े हैं मोहब्बत की राहों में
उनकी मोहब्बत भरी राहों गजल होती है
उनके कदमों की आहट खुशियाँ देती है
उनकी मदभरी निगाहों में गजल होती है
उनकी दूरियाँ पल पल को सताती मुझे
उनके यादों के सायों में गजल होती है
मोहब्बत के जज्बातों से भरा दिल है
उनके होने के एहसासों में गजल होती है