भक्ति, श्रद्धा और आस्था से सजे मां और गणेश जी के सुंदर गीत
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सुशीला तिवारी, पश्चिम गांव, रायबरेली
सारांश:
सुशीला तिवारी जी की इन कविताओं में मां दुर्गा और गणपति बप्पा की भक्ति का अद्भुत चित्रण है। श्रद्धा, साधना और समर्पण के माध्यम से जीवन को उजियारा मिलता है और कष्ट दूर होते हैं। यह रचनाएँ भक्तिमय वातावरण का सृजन करती हैं, जहां भक्ति ही आनंद और शक्ति का आधार है।आइए इन्हें पढ़ें विस्तार से और भक्ति रस में डूब जाएं—
मैया का रूप निराला
मैया का रूप निराला हांथ में सोहे कंठी माला ,
इनकी साधना से मिलता ज्ञान दीप उजियाला।
स्वेत वस्त्र धारण करती जगमग ज्योति जले,
भक्ति साधना भक्त करे मनवांछित फल मिले।
पूजन -आराधन से होवे जीवन पथ उजियारा ,
प्रेम समर्पण हर उर जागे ये बन जाये आधारा।
सुख,समृद्धि मिले खुशहाली दुख को हर लेती,
दुखियारी शरण में आये खाली झोली भर देती।
जगदंबे भयमोचनि, तम नाशिनि करती उद्धार,
श्रद्धापूर्वक ,भक्तिभाव से जो आता मां के द्वार।
श्रद्धा, धैर्य संकल्प लिये अटल तपस्या धारा है ,
निश्छल प्रेम, समर्पण, भक्तों का स्वीकारा है ।
जो मइया की करे साधना वो साधक बन जाता,
जो दुनिया से नही मिला है मातु शरण में पाता ।
सुंदर पुष्पों से सुसज्जित मां का अनुपम श्रंगार ,
दृढता अटल विस्वास “सुशीला”कर दे भव पार ।
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सजा है दरबार मां का
बड़ा सुन्दर नजारा यहाँ का ,
सजा है दरबार मां का।
आई जगाने मइया नव चेतना ,
जी भर भक्तजन मां को देखना,
सब करते जय जयकार मां का,
सजा है दरबार मां का ।
ऊंचे मंदिर में मां शेरों वाली ,
करती नेह से जगत रखवाली,
मिले भक्ति भाव अपार मां का ,
सजा है दरबार मां का ।
पूजा की थाल सजी है भाव से ,
जीवन यापन मां मेरा अभाव से,
दया द्रष्टि होवे उपकार मां का,
सजा है दरबार मां का ।
झांकी मनभावन फैली खुशहाली ,
सिंह पे सवार मइया भवन पधारी ,
“सुशीला” है प्यार अपार मां का,
सजा है दरबार मां का ।
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मइया जी की शरण चले हम
प्रथम दिवस मां शैल पुत्री का,
आओ सब नमन करे हम ।
पूजा की थाल सजा करके ,
मइया जी की शरण चलें हम ।
लाल सिंदूर लाल लेके बिंदिया ,
लाल महावर पाँव में बिछिया,
जयकारे लगाते मगन चले हम ,
मइया जी की शरण चले हम ।
भक्ति भाव से हम पूजा करेंगे ,
अंतर व्यथा को मइया से कहेंगे ,
फूल नही ले पूरा चमन चले हम ,
मइया जी की शरण चले हम ।
आई है चरण शरण में “सुशीला”,
देकर भक्तिदान मां करदो लीला ,
कर दो कष्टों का दमन चले हम ,
मइया जी की शरण चले हम ।
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गौरी पुत्र गणेश
रिद्धि- सिद्धि को देने वाले हे ! गौरी पुत्र विनायक ,
दुख हरता , सुख कर्ता हो प्रथम पूजय गणनायक ।
सब पूर्ण मनोरथ करते जो भी तुमको ध्यावे ,
हर लेते सकल क्लेश मनवांछित फल भी पावे।
शिव शंकर पुत्र कहाते हैं गौरा जी के हो लाला,
लम्बी सूंड उदर के भारी , मूसक की सवारी वाला।
मोदक दुर्वा है अति प्यारा फूलों की गले में माला,
कहो गणेश या गणपति बप्पा या गौरी के लाला ।
पावन कर दो तन मन मेरा शरणागत है “सुशीला”
हम मतिमंद मूढ है भगवन , दर्शन दो करो लीला ।
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