भाई-बहन के अटूट बंधन का दिव्य उत्सव – प्रेम, आशीर्वाद और परंपरा का संगम
प्रस्तुति: शिखा तैलंग, भोपाल
सारांश:
भाई दूज भाई-बहन के प्रेम, सुरक्षा और संस्कार का प्रतीक पर्व है। यह यमराज और यमुना की कथा से प्रेरित होकर स्नेह के पवित्र बंधन का उत्सव बन गया। आज भी यह त्योहार भारतीय परिवारों में प्रेम और एकता की भावना को जीवित रखता है। आइए आत्मीयता, स्नेह और धार्मिक भावनाओं से ओतप्रोत इस पावन पर्व के बारे में जानें विस्तार से—
दीपावली के पाँच दिवसीय पर्वों में अंतिम और अत्यंत पावन दिन है भाई दूज, जिसे भ्रातृ द्वितीया भी कहा जाता है। यह दिन भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के स्नेह, अपनापन और रक्षा के अनूठे बंधन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु, सुख-समृद्धि और मंगल की कामना करती हैं, वहीं भाई अपनी बहनों को उपहार देकर उन्हें सदा संरक्षित और स्नेह से संजोए रखने का वचन देते हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार, सूर्यदेव की पत्नी छाया और उनके पुत्र यमराज एवं पुत्री यमुना का उल्लेख मिलता है। यमुना अपने भाई यमराज को बहुत प्रेम करती थीं और उनसे मिलने के लिए बार-बार निमंत्रण भेजती थीं। एक दिन यमराज ने बहन का स्नेह स्वीकार किया और उनके घर पहुंचे। यमुना ने उन्हें स्नान कराया, स्वादिष्ट भोजन कराया और तिलक कर उनकी दीर्घायु की कामना की। यमराज ने प्रसन्न होकर कहा कि जो बहन आज के दिन अपने भाई को इसी विधि से तिलक करेगी, उसके भाई की आयु लंबी होगी और मृत्यु के भय से मुक्त रहेगा। तभी से भाई दूज का पर्व मनाने की परंपरा आरंभ हुई।
भारत के विभिन्न राज्यों में इस पर्व को अलग-अलग नामों से जाना जाता है—बंगाल में इसे भाई फोटा, महाराष्ट्र और गोवा में भाऊबीज, उत्तर भारत में भाई दूज कहा जाता है। परंतु उद्देश्य हर जगह एक ही है—भाई-बहन के बीच स्नेह और आत्मीयता का उत्सव मनाना।
इस दिन बहनें सुबह स्नान कर पूजा की थाली सजाती हैं, जिसमें रोली, चावल, मिठाई, दीपक और नारियल रखा जाता है। फिर भाई को तिलक लगाकर आरती करती हैं और मिठाई खिलाती हैं। कुछ परिवारों में यमुना स्नान या नदी-स्नान का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे पापों का क्षय होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
आधुनिक युग में भी भाई दूज का महत्व कम नहीं हुआ है। व्यस्त जीवनशैली के बावजूद, भाई-बहन इस दिन एक-दूसरे से मिलने का समय निकालते हैं या ऑनलाइन ही प्रेम के संदेश और उपहार भेजकर इस बंधन को जीवंत रखते हैं। यह त्योहार केवल रिश्तों को मजबूत नहीं करता बल्कि हमें यह भी याद दिलाता है कि परिवार ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है। भाई दूज भारतीय संस्कृति के उस अमर भाव का प्रतीक है, जिसमें स्नेह, आशीर्वाद और सुरक्षा तीनों एक साथ झलकते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि रिश्ते भले ही समय के साथ बदलें, पर प्रेम और संस्कार की जड़ें कभी नहीं सूखतीं।
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हमारे छत्तीसगढ़ में इस दिन गोवर्धन पूजा भी मनाई जाती है।